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MNS ने शिवसेना (UBT) पर लगाया गंभीर आरोप, कहा- बीजेपी से एक करोड़ रुपये लेकर दिया समर्थन

Written by:Shyam Dwivedi
Published:
महाराष्ट्र के चंद्रपुर में मेयर चुनाव के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। बीजेपी उम्मीदवार की जीत के पीछे उद्धव ठाकरे गुट (UBT) का समर्थन बताया जा रहा है, जिस पर राज ठाकरे की मनसे ने 'खोखे की राजनीति' का आरोप लगाते हुए करोड़ों के लेन-देन का दावा किया है। शिवसेना (यूबीटी) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
MNS ने शिवसेना (UBT) पर लगाया गंभीर आरोप, कहा- बीजेपी से एक करोड़ रुपये लेकर दिया समर्थन

चंद्रपुर: महाराष्ट्र के चंद्रपुर महानगरपालिका में हुए मेयर चुनाव के नतीजों ने राज्य की सियासत में एक नया तूफान खड़ा कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार ने मेयर पद पर जीत तो हासिल कर ली, लेकिन इस जीत ने शिवसेना के दोनों गुटों को एक बार फिर आमने-सामने ला दिया है। राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना-यूबीटी) पर बीजेपी से पैसे लेकर समर्थन देने का सनसनीखेज आरोप लगाया है, जिससे दोनों भाइयों के बीच हाल में बनी नजदीकी पर सवाल खड़े हो गए हैं।

चंद्रपुर महानगरपालिका में कुल 76 पार्षद हैं और बीजेपी के पास अकेले बहुमत का आंकड़ा नहीं था। आरोप है कि उद्धव गुट के कुछ पार्षदों के समर्थन की वजह से ही बीजेपी का मेयर बनना संभव हो सका। इसी को लेकर मनसे ने उद्धव गुट पर निशाना साधा है।

मनसे का दावा: ‘पार्षदों को एक-एक करोड़ दिए गए’

मनसे के प्रवक्ता संदीप देशपांडे ने इस मामले में सीधे तौर पर पैसों के लेन-देन का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह समर्थन बिना किसी सौदे के नहीं हुआ है।

“मुझे मेरे विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि जो नगरसेवक बीजेपी के पक्ष में गए, उन्हें एक-एक करोड़ रुपये दिए गए, साथ ही और भी ऑफर दिए गए। चंद्रपुर में उद्धव ठाकरे गुट (यूबीटी) के जो पार्षद गए, उन्हें एक करोड़ और निर्दलीय पार्षद को 50 लाख रुपये दिए गए। ये मेरी जानकारी है और इसकी जांच होनी चाहिए।”- संदीप देशपांडे, प्रवक्ता, मनसे

मनसे ने इसे ‘खोखे की राजनीति’ करार देते हुए कहा कि यह उद्धव गुट के दोहरे चरित्र को उजागर करता है। पार्टी ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

शिवसेना (UBT) का पलटवार, आरोपों को बताया बेबुनियाद

वहीं, उद्धव ठाकरे गुट ने मनसे के इन सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद और वरिष्ठ नेता संजय राउत ने मनसे पर पलटवार करते हुए कहा कि यह सिर्फ पार्टी को बदनाम करने की साजिश है।

संजय राउत ने कहा, “जिन्होंने पैसे लेने का आरोप लगाया है, क्या वे वहां बैग गिनने बैठे थे? क्या उन्हें कमीशन मिला था? यह चंद्रपुर का स्थानीय स्तर का फैसला था और इसमें उद्धव जी की कोई भूमिका नहीं है। जिसने गंदगी की है, उसे जवाब देना होगा, लेकिन शिवसेना को दोष देना बंद करें।”

क्या फिर बढ़ेंगी दोनों भाइयों में दूरियां?

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब कुछ ही हफ़्ते पहले उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक मंच पर साथ नजर आए थे, जिसके बाद उनके बीच राजनीतिक सुलह के कयास लगाए जा रहे थे। चंद्रपुर की इस घटना ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। अब देखना यह होगा कि यह सियासी बवाल कितना आगे बढ़ता है और इसका असर दोनों भाइयों के रिश्तों और महाराष्ट्र की भावी राजनीति पर क्या पड़ता है।

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