विमानन सुरक्षा नियमों के एक बड़े उल्लंघन के मामले में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एयर इंडिया पर 1 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। नियामक ने यह कार्रवाई तब की जब जांच में पाया गया कि एयरलाइन ने अपने एक एयरबस विमान को बिना वैध ‘एयरवर्थिनेस रिव्यू सर्टिफिकेट’ (ARC) के ही कई व्यावसायिक उड़ानों के लिए इस्तेमाल किया।
यह मामला यात्रियों की सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है, क्योंकि किसी भी विमान के लिए उड़ान भरने से पहले एआरसी अनिवार्य होता है। यह सर्टिफिकेट इस बात की पुष्टि करता है कि विमान उड़ान भरने के लिए पूरी तरह से सुरक्षित और तकनीकी रूप से फिट है।
क्या है पूरा मामला?
DGCA की जांच के अनुसार, एयर इंडिया के एक एयरबस विमान ने 24 से 25 नवंबर के बीच कुल आठ उड़ानें भरीं, जबकि उसके पास उस समय वैध एआरसी नहीं था। इन उड़ानों का संचालन देश के प्रमुख महानगरों— दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद के बीच किया गया था। यह एक गंभीर चूक है, क्योंकि बिना वैध प्रमाणन के किसी भी विमान का व्यावसायिक संचालन सुरक्षा निगरानी प्रक्रिया को कमजोर करता है।
क्यों जरूरी है एयरवर्थिनेस सर्टिफिकेट?
एयरवर्थिनेस रिव्यू सर्टिफिकेट (ARC) किसी भी विमान के लिए एक वार्षिक प्रमाण पत्र होता है। यह विमान की तकनीकी स्थिति, रखरखाव के रिकॉर्ड और सभी सुरक्षा मानकों की गहन जांच के बाद ही जारी किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विमान नागरिक उड्डयन नियामक के सभी नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन कर रहा है।
इसके बिना उड़ान भरने का मतलब है कि विमान की सुरक्षा स्थिति की पुष्टि नहीं की गई है, जिससे उड़ान के दौरान जोखिम पैदा हो सकता है। DGCA ने इस मामले को सुरक्षा से समझौता मानते हुए सख्त कदम उठाया है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इस कार्रवाई को विमानन उद्योग में सुरक्षा मानकों के कड़े पालन के एक स्पष्ट संकेत के रूप में देखा जा रहा है।





