पश्चिम एशिया में ईरान, इज़रायल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दोपहर 2 बजे लोकसभा में बयान देंगे। यह बयान क्षेत्रीय स्थिति, ऊर्जा सुरक्षा, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों पर केंद्रित हो सकता है।
संसद के मौजूदा सत्र में यह बयान विशेष महत्व रखता है क्योंकि विपक्ष ने सरकार की विदेश नीति और युद्ध पर रुख को लेकर सवाल उठाए हैं। भारत के लिए यह स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि लाखों भारतीय मिडिल ईस्ट देशों में काम करते हैं और देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है।
पीएम मोदी लोकसभा में देंगे बयान
पीएम मोदी आज दोपहर दो बजे लोकसभा में मिडिल ईस्ट के हालात पर अहम बयान देंगे। ईरान, इज़रायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी युद्ध अब व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप ले चुका है और इसके प्रभाव दुनिया भर में महसूस किए जा रहे हैं। भारत दुनिया का प्रमुख तेल आयातक होने के नाते, इस संघर्ष से सीधे प्रभावित है। देश में ज्यादातर क्रूड मिडिल ईस्ट से आता है जिससे तेल-गैस कीमतों में उछाल देखा जा रहा है।
बता दें कि इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमलों की शुरुआत हुई। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इज़रायल, अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी देशों पर मिसाइल व ड्रोन हमले किए। अब युद्ध चौथे सप्ताह में है और इस कारण होर्मुज जलडमरूमध्य की शिपिंग पर खासा असर पड़ा है।
वैश्विक स्थिति पर सरकार की नज़र
सरकार के अनुसार स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है। रविवार को पीएम मोदी ने कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की उच्च स्तरीय बैठक ली जिसमें पेट्रोलियम, क्रूड, गैस, बिजली, उर्वरक और लॉजिस्टिक्स की सप्लाई पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि ऊर्जा आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए। पीएम मोदी ने इस दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, इज़रायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू, कतर, ओमान, जॉर्डन, यूएई और अन्य नेताओं से बात भी की। उन्होंने महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की निंदा की, नागरिकों की सुरक्षा पर जोर दिया और डायलॉग-कूटनीति के माध्यम से शांति की अपील की।






