आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने प्रमुख युवा चेहरा और सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया है। दरअसल इस अचानक हुए फैसले से सियासी गलियारों में हलचल मच गई है। राघव चड्ढा को पद से हटाए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) समेत अन्य विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। इस सियासी विवाद में अब केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय निरुपम की भी एंट्री हो गई है, जिन्होंने इस कार्रवाई को लेकर केजरीवाल सरकार पर तीखे हमले किए हैं।
दरअसल केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर सीधा तंज कसा है। बिट्टू ने अपने बयान में कहा है कि, “ATM के तौर पर राघव चड्ढा की भूमिका अब खत्म हो गई है। पंजाब से पैसे इकट्ठा करके केजरीवाल को देने की राघव चड्ढा की क्षमता अब समाप्त हो चुकी है। अब पंजाब में केजरीवाल का सीधा संपर्क है।”
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राघव चड्ढा AAP के लिए एक ATM की तरह काम करते थे: रवनीत सिंह बिट्टू
यह टिप्पणी आम आदमी पार्टी के अंदरूनी वित्तीय प्रबंधन और पंजाब में उसकी कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। बिट्टू ने आरोप लगाया है कि राघव चड्ढा AAP के लिए एक ATM की तरह काम करते थे और अलग-अलग मामलों में अरविंद केजरीवाल के लिए फंड जुटाते थे। उनका कहना है कि अब केजरीवाल ने एक ‘ATM’ के बजाय ‘एक बैंक’ ढूंढ लिया है, जिसका मतलब है कि पार्टी ने फंड जुटाने के लिए कोई नया या सीधा तरीका तलाश लिया है। यह आरोप आम आदमी पार्टी की वित्तीय पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है।
पंजाब के मुख्यमंत्री पर भी साधा निशाना, दी चेतावनी
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने सिर्फ राघव चड्ढा पर ही नहीं, बल्कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर भी टिप्पणी की है। उन्होंने भगवंत मान को चेतावनी देते हुए कहा है कि जिस दिन मान ने केजरीवाल और उनकी टीम की बात सुनना बंद कर दिया, उनका हाल भी कुछ ऐसा ही होगा जैसा आज राघव चड्ढा का हुआ है। बिट्टू ने यह भी कहा है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब के किसी व्यक्ति को सांसद बनाने के बजाय ऐसे व्यक्ति को सांसद बनाया है जो पंजाब का नहीं है, इसलिए ऐसा होना ही था। बिट्टू के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति सच में पंजाब का नहीं है, तो वह आपकी पार्टी का कैसे हो सकता है। यह बयान पंजाब में आम आदमी पार्टी के ‘बाहरी बनाम स्थानीय’ नेतृत्व के मुद्दे को भी हवा देता है, जो अक्सर क्षेत्रीय राजनीति में संवेदनशील विषय रहा है।
इस पूरे मामले में शिवसेना के नेता संजय निरुपम ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। संजय निरुपम ने AAP सांसद राघव चड्ढा के ‘पर कतरने’ यानी उनके प्रभाव को कम करने का सबसे बड़ा कारण बताया है कि जब अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले और अन्य मामलों में जेल गए थे, तब शायद उनके समर्थन में राघव चड्ढा खुलकर सामने नहीं आए थे। निरुपम ने कहा है कि, “जैसे बाकी सभी लोग केजरीवाल को ईमानदार बता रहे थे, वैसे ही AAP की अपेक्षा थी कि राघव चड्ढा भी उन्हें ईमानदार बताएं।”
संजय निरुपम के इस बयान से यह संकेत मिलता है कि आम आदमी पार्टी के भीतर नेताओं से वफादारी और एकजुटता की एक उम्मीद रहती है, खासकर तब जब पार्टी सुप्रीमो कानूनी मुश्किलों में घिरे हों। चड्ढा का इस उम्मीद पर खरा न उतरना ही उनके खिलाफ कार्रवाई का एक कारण हो सकता है। यह घटना पार्टी के भीतर असहमति या अलग राय रखने वाले नेताओं के भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े करती है।
संजय निरुपम ने आम आदमी पार्टी के खुद को ‘आम आदमी की पार्टी’ बताने के दावे पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा है कि राघव चड्ढा राज्यसभा में आम आदमी से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाते हैं, लेकिन AAP जो खुद को आम आदमी की पार्टी कहती है, वही आम आदमी के मुद्दे पर बोलने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। निरुपम ने आरोप लगाया है कि, “राघव चड्ढा ने अरविंद केजरीवाल को ईमानदार नहीं बताया, इसलिए अब जो भ्रष्टाचार के समर्थक लोग हैं, वे भ्रष्टाचार का विरोध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं।”