केरल के कुट्टिकानम स्थित मारियन कॉलेज में शुक्रवार को छात्रों के साथ संवाद के दौरान कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर के कई मुद्दों को एक साथ जोड़ा। चर्चा का केंद्र केवल राजनीतिक टकराव नहीं था, बल्कि तकनीक, शिक्षा, मीडिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की दिशा पर था। उन्होंने खास तौर पर इस बात पर जोर दिया कि आने वाले वर्षों में भारत की स्थिति इस बात से तय होगी कि देश डेटा, उत्पादन और तकनीकी आत्मनिर्भरता को किस तरह संभालता है।
राहुल गांधी ने कहा कि भारत का भविष्य केवल सेवा-आधारित अर्थव्यवस्था से नहीं चलेगा और एआई के दौर में रणनीतिक फैसले ज्यादा निर्णायक होंगे। उनका तर्क था कि अगर देश अपनी सबसे बड़ी डिजिटल संपत्ति डेटा पर नियंत्रण कमजोर करता है, घरेलू उत्पादन नहीं बढ़ाता और सामाजिक स्तर पर ध्रुवीकरण बढ़ता है, तो आर्थिक और तकनीकी क्षमता दोनों प्रभावित होंगी।
एआई पर राहुल गांधी: भारत की स्थिति, डेटा नियंत्रण और रोजगार का सवाल
छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए राहुल गांधी ने भारत की एआई स्थिति पर सीधी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि एआई के वैश्विक परिदृश्य में अभी दो बड़े खिलाड़ी साफ दिखाई देते हैं अमेरिका और चीन। उनके मुताबिक भारत रोबोटिक्स, एआई या आधुनिक तकनीक के प्रमुख क्षेत्रों में उस स्तर पर नहीं पहुंच सका है, जहां वह निर्णायक भूमिका निभा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि एआई क्षमता केवल सॉफ्टवेयर कौशल से नहीं बनती, बल्कि डेटा, कंप्यूटिंग और विनिर्माण के त्रिकोण से बनती है। राहुल गांधी का कहना था कि अगर डेटा का नियंत्रण बाहर चला जाता है तो एआई में देश की स्वतंत्र नीति बनाना कठिन हो जाता है। उन्होंने हालिया भारत-अमेरिका समझौते का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि भारत का डेटा अमेरिकी पक्ष को सौंपे जाने से देश की क्षमता को नुकसान पहुंचा है।
“अगर हम अपना डाटा अमेरिका को सौंप देते हैं, अगर हम कुछ भी उत्पादन नहीं करते और अगर हमारे लोग आपस में लड़ते रहते हैं, तो हम मुसीबत में पड़ जाएंगे।”- राहुल गांधी
राहुल गांधी ने एआई शिखर सम्मेलन का संदर्भ देते हुए कहा कि एक चीनी रोबोट को भारतीय बताकर दिखाया गया था, और इसे उन्होंने भारत की तकनीकी स्थिति पर सवाल के रूप में रखा। उनका कहना था कि एआई में मजबूत बनने के लिए डेटा पर राष्ट्रीय नियंत्रण अनिवार्य है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सेवा और सॉफ्टवेयर क्षेत्र, जिसे उन्होंने भारत की रीढ़ बताया, एआई के विस्तार के साथ रोजगार के दबाव का सामना कर सकता है।
इस हिस्से में उनकी सबसे बड़ी चिंता ‘परिवर्तन की गति’ को लेकर थी। उन्होंने कहा कि डेटा, मैन्युफैक्चरिंग और मोबिलिटी के क्षेत्र में दुनिया तेजी से बदल रही है, जबकि भारत उस बदलाव को सक्रिय रूप से दिशा देने के बजाय उसे होते हुए देख रहा है।
उच्च शिक्षा में वैचारिक हस्तक्षेप का आरोप
उच्च शिक्षा पर बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारतीय विश्वविद्यालय व्यवस्था वैचारिक हमले का सामना कर रही है। उन्होंने दावा किया कि कई कुलपतियों की नियुक्ति योग्यता के बजाय वैचारिक नजदीकी के आधार पर हो रही है और इसे संस्थागत गुणवत्ता के लिए नुकसानदेह बताया।
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का नाम लेते हुए कहा कि शिक्षा तंत्र को किसी एक विभाजनकारी दृष्टिकोण के दायरे में सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक विश्वविद्यालयों का दायरा बहुलता, आलोचनात्मक सोच और स्वतंत्र विमर्श से तय होना चाहिए, न कि राजनीतिक निष्ठा से।
फिल्म, टीवी और मीडिया पर क्या कहा
राहुल गांधी ने मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र की भूमिका पर भी विस्तृत टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि फिल्म, टेलीविजन और मीडिया का इस्तेमाल कई बार लोगों को बदनाम करने, सामाजिक रूप से अलग-थलग करने और समाज में फूट पैदा करने के लिए किया जा रहा है। उनका आरोप था कि यह प्रक्रिया कुछ खास राजनीतिक-आर्थिक हितों को लाभ पहुंचाने के लिए होती है।
उन्होंने ‘केरल स्टोरी’ का उल्लेख करते हुए कहा कि केरल में उसे अपेक्षित तवज्जो नहीं मिली, और इसे उन्होंने राज्य के सामाजिक अनुभव से जोड़ा। राहुल गांधी का कहना था कि कुछ विचारों पर सार्वजनिक हमला होता है, जबकि कुछ अन्य विचार बिना रोक-टोक फैलाए जाते हैं, और इस असंतुलन के पीछे बड़े पैमाने पर धन के इस्तेमाल की बात भी उन्होंने कही।
“अगर कोई व्यक्ति किसी खास तरह की फिल्म बनाना चाहता है या कोई विचार रखना चाहता है, तो उस पर हमला किया जाएगा और उसे बोलने नहीं दिया जाएगा।”- राहुल गांधी
‘सही मकसद की राजनीति कठिन है’
छात्र संवाद के अंत में राहुल गांधी ने राजनीति की प्रकृति पर व्यक्तिगत अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति राजनीति को गंभीरता से और निश्चित मूल्यों के साथ करता है, तो यह आसान रास्ता नहीं होता। उनके शब्दों में, गलत मकसद से राजनीति करना अपेक्षाकृत सरल है, लेकिन सही मकसद से उतरने पर कष्ट, विरोध और दबाव झेलना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि राजनीति में प्रवेश के समय उन्हें अक्सर सुनने को मिला कि ईमानदारी संभव नहीं है, लेकिन उन्होंने इस धारणा को स्वीकार नहीं किया। राहुल गांधी के मुताबिक उनका प्रयास यही समझना है कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता की सीमा क्या है और किस हद तक मूल्य-आधारित राजनीति को व्यवहार में बदला जा सकता है।
मारियन कॉलेज में हुई यह बातचीत चुनावी भाषण की शैली से अलग छात्र-केन्द्रित संवाद के रूप में रही, जिसमें एआई से लेकर संस्थानों की स्वायत्तता तक कई सवाल एक साथ सामने आए। राहुल गांधी ने अपने जवाबों में तकनीक, अर्थव्यवस्था, शिक्षा और लोकतांत्रिक बहस को जोड़कर राजनीतिक प्राथमिकताओं का संकेत देने की कोशिश की।
LIVE: Interactive Session with Students of Marian College | Idukki, Keralam https://t.co/Lq4Or12fEo
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) March 6, 2026





