समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में इफ्तार पार्टी के बाद बड़ा राजनीतिक बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा थी कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रधानमंत्री के रूप में रिटायर हों, लेकिन अब स्थिति अलग दिख रही है। अखिलेश का कहना था कि जो लोग राजनीति को समझते हैं, उन्हें पहले दिन से पता था कि भाजपा आगे क्या कदम उठाएगी।
“हम तो चाहते थे कि नीतीश कुमार प्रधानमंत्री के रूप में रिटायर हों, लेकिन अब वो राज्यसभा के मेंबर होकर ही रिटायर हो जाएंगे।” — अखिलेश यादव
मीडिया से बातचीत में सपा प्रमुख ने साफ कहा कि वे और उनके साथ के लोग मिलकर नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री बनाना चाहते थे। उनके इस बयान को विपक्षी राजनीति और संभावित राष्ट्रीय समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है, खासकर उस समय जब कई दल केंद्र की राजनीति में नए समीकरण बनाने की चर्चा कर रहे हैं।
ईरान-इजरायल युद्ध पर सपा का रुख
अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर सवाल आने पर अखिलेश यादव ने युद्ध के खिलाफ स्पष्ट रुख रखा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी कभी युद्ध के पक्ष में नहीं रही और युद्ध का नतीजा हमेशा नुकसान और दुख के रूप में सामने आता है।
“हम युद्ध के पक्ष में नहीं हैं। समाजवादी पार्टी कभी युद्ध के पक्ष में नहीं रही है। युद्ध नुकसान करता है, युद्ध जानें लेता है। युद्ध के परिमाण हमेशा दुखदायी होते हैं।” — अखिलेश यादव
उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध के सवाल पर मानवीय दृष्टिकोण जरूरी है और किसी भी संघर्ष का असर आम लोगों पर सबसे ज्यादा पड़ता है।
खामेनेई से जुड़े सवाल पर केंद्र सरकार पर टिप्पणी
अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और शोक जताने से जुड़े सवाल पर अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की भूमिका पर प्रश्न उठाया। उनका कहना था कि जहां भारत सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, वहां विपक्ष को मजबूरी में बोलना पड़ रहा है।
इस संदर्भ में उन्होंने सरकार को “कमजोर” बताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति पहले कम ही देखने को मिली है। उनका यह बयान विदेश मामलों पर केंद्र और विपक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक बहस का हिस्सा माना जा रहा है।
विदेश नीति और व्यापारिक संबंधों पर क्या बोले
विदेश नीति पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि जो दिख रहा है, वही पूरी तस्वीर नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि पर्दे के पीछे किसके साथ किस तरह के संबंध हैं, यह स्पष्ट नहीं है।
अखिलेश ने चीन, फ्रांस, रूस, अमेरिका और यूरोप के देशों के साथ व्यापार का जिक्र करते हुए कहा कि भारत कई देशों से आर्थिक रूप से जुड़ा है और अलग-अलग स्तर पर समझौते भी हुए हैं। उन्होंने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार ने भारत को विदेश नीति में उलझा दिया है।
उनके बयान का केंद्र बिंदु यह रहा कि विदेश नीति केवल सार्वजनिक बयानों से नहीं, बल्कि वास्तविक रणनीतिक और आर्थिक संबंधों से समझी जानी चाहिए।
गंगा-जमुनी तहजीब पर भी दिया संदेश
इफ्तार कार्यक्रम के सामाजिक पहलू पर बात करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि भारत की पहचान यही है कि अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होते हैं। उन्होंने इसे हिंदुस्तानियत और गंगा-जमुनी तहजीब की परंपरा बताया।
अखिलेश यादव ने कहा कि देश की संस्कृति मिश्रित है और यहां जितनी विविधता के साथ लोग साथ रहते हैं, वह दुनिया में विरले ही देखने को मिलती है। उन्होंने हाल में मनाई गई होली का जिक्र करते हुए कहा कि लोग गले मिले थे, और ईद पर भी यही सामाजिक मेल-जोल दिखाई देगा।
लखनऊ में दिया गया यह बयान राजनीतिक और सामाजिक—दोनों स्तरों पर चर्चा में है, क्योंकि इसमें राष्ट्रीय राजनीति, विदेश नीति, युद्ध पर पार्टी का रुख और सामाजिक सौहार्द जैसे कई मुद्दे एक साथ सामने आए।






