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पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट पर बवाल, धरने पर बैठीं सीएम ममता बनर्जी, चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप

Written by:Ankita Chourdia
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पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता के एस्प्लेनेड मेट्रो चैनल पर धरना शुरू किया है। उनका आरोप है कि जीवित और पात्र मतदाताओं के नाम भी हटाए गए हैं और कई लोगों को मृत दिखाया गया है। राज्य में चुनाव कार्यक्रम की संभावित घोषणा से ठीक पहले शुरू हुए इस विरोध में तृणमूल कांग्रेस ने लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमले का आरोप दोहराया है।
पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट पर बवाल, धरने पर बैठीं सीएम ममता बनर्जी, चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप

राज्य में चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में मतदाता सूची का मुद्दा केंद्र में आ गया है। कोलकाता के भीड़भाड़ वाले केंद्रीय हिस्से, एस्प्लेनेड मेट्रो चैनल, पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी SIR के खिलाफ धरने पर बैठी हैं। उनका कहना है कि पुनरीक्षण के दौरान जीवित और पात्र लोगों के नाम भी हटाए गए और कई मतदाताओं को मृत घोषित कर दिया गया।

धरने के दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि 22 ऐसे वोटरों के परिवार आज मंच पर आ रहे हैं, जिनके नामों को लेकर विवाद है। यह विरोध ऐसे समय शुरू हुआ है जब राज्य में चुनाव की तारीखों की घोषणा में गिने-चुने दिन बचे बताए जा रहे हैं और लगभग 15 मार्च के आसपास कार्यक्रम आने की उम्मीद जताई जा रही है।

एसआईआर पर चुनाव आयोग से सीधे टकराव का संकेत

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने चुनाव आयोग पर पक्षपात, बड़े पैमाने पर नाम काटने, दस्तावेजों की मांग की प्रक्रिया और उसे अमानवीय तरीके से लागू करने के आरोप लगाए हैं। इस मुद्दे पर वे पहले सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा चुकी हैं। उन्होंने SIR की तुलना NRC से की थी और पहले चेतावनी दी थी कि अगर बंगाल के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला हुआ तो वे देशव्यापी राजनीतिक प्रतिक्रिया खड़ी करेंगी।

एस्प्लेनेड वही इलाका है जहां ममता बनर्जी विपक्ष में रहते हुए भी बार-बार विरोध दर्ज कराती रही हैं। इस बार भी उनके साथ पार्टी के कई नेता मौजूद रहे, जिन्होंने गले में SIR विरोधी छोटे बैनर लटकाए।

टीएमसी का राजनीतिक संदेश और आंकड़ों की जंग

धरने की तस्वीरें साझा करते हुए तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि बंगाल के लोगों की लोकतांत्रिक आवाज छीनने की साजिश की जा रही है। पार्टी ने केंद्र की राजनीति पर निशाना साधते हुए दावा किया कि बंगाल को मनमाफिक ढंग से चलाने की कोशिशों का जवाब प्रतिरोध से दिया जाएगा।

“बंगाल की याददाश्त लंबी है और विरोध की परंपरा उससे भी ज्यादा लंबी है।”- तृणमूल कांग्रेस

इसी बहस के बीच यह तर्क भी सामने रखा जा रहा है कि SIR में सबसे अधिक नाम बंगाल में नहीं कटे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 13.4% नाम गुजरात में और 17% नाम अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में हटाए गए।

बंगाल की फाइनल लिस्ट में क्या बदला

राज्य में SIR प्रक्रिया के दौरान लगातार असंतोष की खबरें सामने आईं कथित मौतों से जुड़े दावे, आरोप-प्रत्यारोप, तीखी बैठकों और कुछ जगह हिंसा की घटनाओं तक। अब तक के आंकड़ों के अनुसार पश्चिम बंगाल में कुल मतदाताओं में से 63.66 लाख यानी 8.3% नाम हटाए जा चुके हैं।

इसके साथ ही करीब 60.06 लाख मतदाताओं की स्थिति अभी अंतिम नहीं मानी जा रही, जिन पर न्यायिक अधिकारियों को निर्णय लेना है। SIR पूरा होने के बाद राज्य में मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ बताई गई है। हालांकि इस 7.04 करोड़ के भीतर वही लगभग 60 लाख नाम भी शामिल हैं जिन पर फैसला लंबित है, इसलिए अंतिम संख्या और नीचे जा सकती है।

यही वजह है कि मतदाता सूची का प्रश्न अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह गया, बल्कि चुनाव से पहले बंगाल की सबसे बड़ी राजनीतिक बहस बनता दिख रहा है।

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