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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फ्रांसीसी समकक्ष कैथरीन वॉतरीन से दिल्ली में की मुलाकात, पाकिस्तान को बताया गंभीर खतरा

Written by:Ankita Chourdia
Published:
नई दिल्ली में आयोजित भारत-फ्रांस रक्षा संवाद के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा उठाया और इसे पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा बताया। दोनों देशों के बीच संयुक्त रक्षा उत्पादन, सैन्य अभ्यास और हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर महत्वपूर्ण सहमति बनी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फ्रांसीसी समकक्ष कैथरीन वॉतरीन से दिल्ली में की मुलाकात, पाकिस्तान को बताया गंभीर खतरा

भारत और फ्रांस ने अपने रणनीतिक संबंधों को और मजबूती देते हुए नई दिल्ली में रक्षा वार्ता की सह-अध्यक्षता की। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की नवनियुक्त रक्षा मंत्री कैथरीन वॉतरीन के बीच हुई इस उच्च-स्तरीय बैठक में कई अहम द्विपक्षीय और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर कैथरीन वॉतरीन को रक्षा मंत्री का पद संभालने पर बधाई भी दी।

इस महत्वपूर्ण संवाद के दौरान भारत ने सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान की धरती से प्रायोजित आतंकवाद भारत में अशांति और हिंसा फैलाने का एक निरंतर माध्यम बना हुआ है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने का पाकिस्तान का एक लंबा इतिहास रहा है, जो पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए एक गंभीर खतरा है।

संयुक्त रक्षा उत्पादन और सैन्य सहयोग पर सहमति

दोनों नेताओं के बीच बातचीत का एक बड़ा फोकस रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देना रहा। भारत और फ्रांस ने संयुक्त विकास और उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर चर्चा की। इस बात पर जोर दिया गया कि दोनों देशों के रक्षा उद्योगों को नई और विशेष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

इसके अलावा, दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग को और प्रगाढ़ करने की प्रतिबद्धता भी जताई गई। राजनाथ सिंह ने फ्रांस के उस फैसले की सराहना की जिसके तहत द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास को हर दो साल के बजाय अब सालाना आयोजित किया जाएगा। यह कदम दोनों सेनाओं के बीच आपसी तालमेल को और बेहतर बनाएगा।

हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ेगी रणनीतिक साझेदारी

बैठक में हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में सुरक्षा सहयोग को लेकर भी चर्चा हुई। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत इस क्षेत्र में हमेशा से एक ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ और किसी भी संकट की स्थिति में सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वाले देश की भूमिका निभाता रहा है।

दोनों देशों ने एक दूसरे के सैन्य मुख्यालयों में संपर्क अधिकारियों (Liaison Officers) की तैनाती करने की भी घोषणा की, जो आपसी समन्वय को एक नया आयाम देगा। रक्षा मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच हाल में हुई एफटीए वार्ता सुरक्षा और रक्षा साझेदारी को गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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