नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में स्कूल फीस और एडमिट कार्ड को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद पर एक निजी स्कूल के साथ सांठगांठ का आरोप लगाते हुए जोरदार हमला बोला है। AAP ने सवाल किया है कि एपीजे स्कूल के प्रिंसिपल और मैनेजर छात्रों के एडमिट कार्ड लेकर शिक्षा मंत्री के आवास पर क्या कर रहे थे।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब स्कूल द्वारा कथित तौर पर फीस वृद्धि को लेकर छात्रों के एडमिट कार्ड रोके जाने की खबरें आईं। आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे पर सोमवार को स्कूल के बाहर धरना भी दिया था।
सरकार और स्कूल की मिलीभगत का आरोप
विधायक संजीव झा और कुलदीप कुमार के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने शिक्षा मंत्री आशीष सूद की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “आशीष सूद खुद को 18 लाख बच्चों का अभिभावक बताते हैं। अगर ऐसा होता तो वे एडमिट कार्ड रोकने वाले स्कूल पर FIR कराते, लेकिन दिल्ली सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया।”
AAP नेताओं ने आरोप लगाया कि जब वे स्कूल के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे, उसी समय स्कूल के प्रिंसिपल और मैनेजर शिक्षा मंत्री के घर पर मौजूद थे। संजीव झा ने कहा, “जब हमने आशीष सूद के साथ स्कूल के प्रिंसिपल की फोटो देखी, तब समझ में आया कि इस मामले में जितना स्कूल जिम्मेदार है, उतनी ही सरकार भी जिम्मेदार है।”
“पेरेंट्स के लिए स्कूल फीस की लड़ाई लड़नी बहुत मुश्किल होती है, क्योंकि इसमें बच्चे शामिल होते हैं, उनका भविष्य जुड़ा होता है। अभिभावक अपनी लड़ाई तो लड़ सकते हैं, लेकिन बच्चों की लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती, क्योंकि बच्चों को स्कूल में प्रताड़ित किया जाता है।”- सौरभ भारद्वाज, AAP नेता
‘बढ़ी हुई फीस दो, वरना एडमिट कार्ड नहीं’
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि स्कूल ने अभिभावकों से साफ कह दिया था कि जब तक बढ़ी हुई फीस नहीं दी जाएगी, तब तक एडमिट कार्ड नहीं मिलेंगे। उन्होंने इस दौरान डीपीएस द्वारका का उदाहरण भी दिया, जहां कथित तौर पर छोटे-छोटे बच्चों को फीस न देने पर कक्षा में बैठने नहीं दिया जाता था और उन्हें लाइब्रेरी में बिठाकर प्रताड़ित किया जाता था।
वहीं, कोंडली से विधायक कुलदीप कुमार ने आशीष सूद के उस दावे को भी खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं थी। कुलदीप ने कहा, “15 फरवरी को ही सौरभ भारद्वाज ने बता दिया था कि कैसे बच्चों को फीस के लिए ब्लैकमेल किया जा रहा है और उनके एडमिट कार्ड रोके जा रहे हैं। लेकिन सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।” इस मामले ने दिल्ली में निजी स्कूलों की फीस और सरकारी रेगुलेशन को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।





