बांग्लादेश में नई सरकार के गठन के साथ ही प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने अपनी कैबिनेट का ऐलान कर दिया है। इस बार विदेश मंत्रालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी एक टेक्नोक्रेट और रिटायर्ड डिप्लोमेट डॉ. खलीलुर रहमान को सौंपी गई है। उनकी नियुक्ति को कूटनीतिक अनुभव और विशेषज्ञता के मिश्रण के तौर पर देखा जा रहा है।
डॉ. रहमान इससे पहले मोहम्मद युनूस की सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जैसे अहम पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वह पेशे से एक मेडिकल डॉक्टर हैं, लेकिन उनका करियर बांग्लादेश की विदेश सेवा में शानदार रहा है।
कौन हैं डॉ. खलीलुर रहमान?
डॉ. खलीलुर रहमान की पृष्ठभूमि काफी प्रभावशाली है। उन्होंने 1985 में बांग्लादेश सिविल सर्विस (फॉरेन सर्विस कैडर) जॉइन की थी। अपने लंबे करियर में वह कनाडा में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रहे और कोरोना महामारी के दौरान विदेश मंत्रालय में चीफ कोऑर्डिनेटर की भूमिका भी निभाई।
उनकी शैक्षणिक योग्यता भी असाधारण है। उन्होंने फ्रांस के इकोले नेशनेल एडमिनिस्ट्रेशन से एमए और सोरबोन यूनिवर्सिटी से एमफिल किया है। इसके अलावा, उन्होंने भारत की प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) से पब्लिक हेल्थ में पीएचडी की डिग्री हासिल की है। वह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साथ भी काम कर चुके हैं।
तारिक रहमान की कैबिनेट के अन्य प्रमुख चेहरे
प्रधानमंत्री तारिक रहमान की कैबिनेट में कई अन्य महत्वपूर्ण चेहरों को भी शामिल किया गया है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान ने अपनी टीम में अनुभवी नेताओं को जगह दी है।
- गृह मंत्री: सलाहुद्दीन अहमद
- वित्त एवं योजना मंत्री: डॉ. अमीर खसरू महमूद
- विदेश राज्य मंत्री: शमा ओबैद
इसके अलावा, कैबिनेट में एकमात्र हिंदू चेहरे के रूप में निताई रॉय चौधरी को भी मंत्री बनाया गया है।
चुनाव में बीएनपी को मिला था प्रचंड बहुमत
हाल ही में संपन्न हुए आम चुनावों में तारिक रहमान की पार्टी, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने शानदार जीत दर्ज की थी। 297 सीटों वाली संसद में बीएनपी को अकेले 209 सीटों पर जीत मिली, जबकि उसकी सहयोगी जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटें हासिल कीं। इस चुनाव में शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं दी गई थी। चार अल्पसंख्यक उम्मीदवार भी चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं।





