Hindi News

कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने पार्टी आलाकमान पर बोला बड़ा हमला, कहा- असहमति नहीं सुन सकते तो शासन का हक नहीं

Written by:Gaurav Sharma
Published:
अपने बयानों से अक्सर चर्चा में रहने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने एक बार फिर अपनी ही पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कांग्रेस आलाकमान को चुनौती दी है कि अगर वे असंतुष्टों की आवाज नहीं सुन सकते तो पार्टी का पतन निश्चित है और उन्हें शासन करने का कोई अधिकार नहीं है।
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने पार्टी आलाकमान पर बोला बड़ा हमला, कहा- असहमति नहीं सुन सकते तो शासन का हक नहीं

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने एक बार फिर अपनी ही पार्टी के नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है, जिससे पार्टी के भीतर की कलह खुलकर सामने आ गई है। उन्होंने मंगलवार को अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो जारी कर कहा कि अगर कांग्रेस पार्टी असहमति के स्वरों को बर्दाश्त नहीं कर सकती, तो यह पार्टी के लिए विनाशकारी है और उसे शासन करने का कोई अधिकार नहीं है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ ही दिन पहले केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की तारीफ करने पर कांग्रेस ने अय्यर की टिप्पणी से किनारा कर लिया था। पार्टी ने कहा था कि उनका अब पार्टी से कोई संबंध नहीं है। इसी पृष्ठभूमि में अय्यर ने पार्टी नेतृत्व को आईना दिखाने की कोशिश की है।

राहुल गांधी को दी बड़ी चुनौती

अपने 23 मिनट के वीडियो में मणिशंकर अय्यर ने कांग्रेस आलाकमान को एक सीधी चुनौती दी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के 1989 में संसद में दिए गए भाषण को याद दिलाते हुए कहा, ‘सिर्फ धर्मनिरपेक्ष भारत ही कायम रह सकता है’। अय्यर ने आलाकमान से सवाल किया, “आप में यह हिम्मत है कि राजीव गांधी के ये शब्द उनके बेटे (राहुल गांधी) के मुंह से कहलवाएं?” उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें कांग्रेस कार्य समिति से बाहर रखा गया है।

“अगर कांग्रेस का मौजूदा तंत्र असहमति का सामना नहीं कर सकता तो यह कांग्रेस के लिए विनाशकारी है। यदि आप असहमति का विनम्रता और स्पष्टता के साथ जवाब नहीं दे सकते तो हमें शासन करने का कोई अधिकार नहीं है।”- मणिशंकर अय्यर

नेहरू-गांधी युग की दिलाई याद

अय्यर ने कांग्रेस के पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के समय में पार्टी के भीतर असहमति का सम्मान किया जाता था। उन्होंने आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा, “जब इंदिरा गांधी ने असहमति के कारण पार्टी तोड़ी और आपातकाल लगाया तो परिणाम क्या निकला? कांग्रेस न सिर्फ हारी, बल्कि इंदिरा गांधी रायबरेली से और संजय गांधी अमेठी से चुनाव हार गए।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि जब भी कांग्रेस में विरोध को कुचलने की कोशिश की जाती है, तो ऐसे ही परिणाम सामने आते हैं। अय्यर ने कहा, “कांग्रेस कई आवाजों के होने के कारण बढ़ती है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस के मौजूदा कर्ताधर्ताओं द्वारा यह सबक भुला दिया गया है।” उन्होंने वी.पी. सिंह और आरिफ मोहम्मद खान जैसे नेताओं का भी जिक्र किया, जो असहमत होकर पार्टी से अलग हुए थे। उन्होंने अपनी बात ‘राजीव गांधी अमर रहें’ के नारे के साथ खत्म की।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
Follow Us :GoogleNews