26 जनवरी को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस की परेड निकलेगी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन इस परेड में अपनी लंबी दूरी की एंटी शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल पहली बार प्रदर्शित करेगी। 1500 किलोमीटर की मारक क्षमता रखने वाली है मिसाइल हैंड महाभारत क्षेत्र में भारत की क्षमताओं को बढ़ाएगी।
कर्तव्य पथ पर निकलने वाली परेड में तीनों सेनाओं को अपना शौर्य दिखाते हुए देखा जाता है। इस बार हाइपरसोनिक मिसाइल इसका हिस्सा बनने वाली है। परियोजना निदेशक ए प्रसाद गौड़ ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि डीआरडीओ हाइपरसोनिक लाइट मिसाइल और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रौद्योगिकयों पर काम चल रहा है। यह मिसाइल भारतीय नौसेना की आवश्यकताओं के लिए विकसित की जा रही है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह हाइपरसोनिक है और दुश्मन के रडार इसे नहीं पकड़ सकते।
1500 किलोमीटर की मारक क्षमता
इस मिसाइल की मारक क्षमता 1500 किलोमीटर है और यह अपने साथ विभिन्न पेलोड लेकर जा सकती है। इसके जरिए समुद्र में तैनात जहाजों पर लगे युद्धक हथियारों को नष्ट किया जा सकता है। ये हाइपरसोनिक स्पीड से चलती है और उच्च वायु गतिकीय दक्षता के साथ यात्रा करती है। यह समुद्री जल में भारत की क्षमता को बढ़ाने का काम करेगी।
144 युवा नौसैनिक शामिल
नौसेना की झांकी में पांचवीं शताब्दी के निर्मित जहाज और विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत सहित स्वदेशी पोतों का चित्रण किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि इस साल नौसेना के दल में 144 युवा नौसैनिक शामिल होंगे, जो ऐतिहासिक कर्तव्य पथ पर कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे।
यह दल लघु भारत का प्रतिनिधित्व करता है क्योंकि इसमें अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नौसैनिक शामिल हैं। इन सभी युवाओं की औसत आयु 25 वर्ष है, जिनका चयन भारतीय नौसेना के विभिन्न विभागों से किया गया है। परेड के लिए इन्हें 2 महीने से ज्यादा का प्रशिक्षण दिया गया है।





