कर्नाटक (Karnataka) में किसानों का प्रदर्शन जारी है। किसान राज्य सरकार से मांग कर रहे हैं कि गन्ने के लिए 3500 प्रति टन उचित मूल्य मिले। अधिकारी और मंत्री किसानों को मनाने में लगे हुए हैं लेकिन राज्य सरकार की ओर से पक्का आश्वासन नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में किसानों का सब्र टूट गया है। प्रदर्शनकारी गन्ना किसानों ने राज्य मंत्री शिवानंद पाटिल (Shivanand Patil) बात करने पहुंचे लेकिन जाते समय उनकी कार पर किसानों ने नारेबाजी करते हुए चप्पलें बरसा दीं।
बता दें कि बेलगावी में प्रदर्शन कर रहे किसानों से बात करने पहुंचे मंत्री शिवानंद पाटिल भी उनको समझाने में असफल रहे। जब वह लौटने लगे तो कथित तौर पर उनकी कार के ऊपर चप्पल फेंक दी गई। किसान गन्ने के लिए अधिक कीमत की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। शुक्रवार को किसानों के प्रदर्शन का नौवां दिन है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) ने भी इस मुद्दे को सुलझाने के लिए किसानों और गन्ना मिल के मालिकों बैठक की है।
उग्र होता जा रहा किसानों का प्रदर्शन
राज्य सरकार की ओर से किसानों के समर्थन में अभी तक कोई भी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है जिससे किसानों को आश्वासन मिले। ऐसे में किसानों का प्रदर्शन उग्र हो गया है। शुक्रवार को किसान अपनी मांगों को लेकर बेंगलुरु-पुणे नेशनल हाइवे को जाम कर दिया और पथराव किया। किसान सरकार पर बढ़ती उत्पादन लागत के बीच उचित मूल्य निर्धारण की उनकी मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगा रहे हैं।
कर्नाटक सरकार ने PM मोदी को लिखी चिट्ठी
गन्ना किसानों के प्रदर्शन को देख कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने किसानों के संकट को हल करने के लिए तुरंत बैठक की मांग की है। सीएम ने प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी में अपील करते हुए लिखा कि मैं आपसे जल्द से जल्द बैठक करने का अनुरोध करता हूं ताकि हम अपने गन्ना किसानों, अपनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कर्नाटक और देश में गन्ने की वैल्यू-चेन की भलाई के लिए मिलकर काम कर सकें।
बीजेपी ने राज्य सरकार पर साधा निशाना
गन्ना किसानों के आंदोलन के बीच बीजेपी ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर निशाना साधा है। बीजेपी नेता आर अशोक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा कि पिछले 7 दिन से हजारों गन्ना किसान सड़कों पर हैं, लेकिन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पास बस एक ही उपाय है: केंद्र को दोष दें। यह बताते हुए कि विपक्ष में रहते हुए सिद्धारमैया बड़े-बड़े उपदेश देते थे, उन्होंने कहा, लेकिन अब (मुख्यमंत्री के रूप में), वह बहानों के पीछे छिप जाते हैं और किसानों को छोड़ देते हैं। अगर आप (सिद्धारमैया) शासन नहीं कर सकते, तो इस्तीफा दे दें और पद छोड़ दें।





