नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को बड़ी राहत प्रदान की है। शीर्ष अदालत ने अपने उस पुराने आदेश को संशोधित कर दिया है, जिसके तहत जनवरी 2017 में ठाकुर को बोर्ड के किसी भी कार्य में शामिल होने से प्रतिबंधित कर दिया गया था। इस नए फैसले के साथ ही सात साल पुराना प्रतिबंध पूरी तरह समाप्त हो गया है।
यह फैसला ठाकुर की उस याचिका पर आया है, जिसमें उन्होंने 2017 के आदेश में संशोधन की मांग की थी। अब वह बीसीसीआई के मौजूदा नियमों और विनियमों के दायरे में रहते हुए बोर्ड की गतिविधियों, बैठकों और अन्य मामलों में हिस्सा ले सकते हैं।
क्या था 2017 का पूरा मामला?
साल 2017 की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू न करने के कारण अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई अध्यक्ष पद से हटा दिया था। उस वक्त कोर्ट ने एक ‘सीज एंड डेसिस्ट’ आदेश जारी किया था, जिसका मतलब था कि वह बोर्ड के मामलों से पूरी तरह दूर रहेंगे। इसके साथ ही उन पर अवमानना और झूठी गवाही के मामले भी शुरू किए गए थे, हालांकि बाद में उन्हें इसमें राहत मिल गई थी।
अनुराग ठाकुर ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि 2017 का यह आदेश उन्हें सुने बिना ही पारित कर दिया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
बोर्ड की गतिविधियों में हो सकेंगे सक्रिय
अनुराग ठाकुर, जो हिमाचल प्रदेश से भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री भी हैं, मई 2016 में बीसीसीआई के अध्यक्ष बने थे। लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने को लेकर बोर्ड और सुप्रीम कोर्ट के बीच लंबे समय तक टकराव चला, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें पद छोड़ना पड़ा।
अब, सात साल बाद सुप्रीम कोर्ट के इस संशोधित आदेश ने उनके लिए भारतीय क्रिकेट प्रशासन में फिर से सक्रिय होने का रास्ता खोल दिया है। हालांकि, उनकी भागीदारी बीसीसीआई के मौजूदा संविधान और नियमों के अधीन होगी। यह फैसला भारतीय क्रिकेट प्रशासन में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।





