सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस के सात मामलों में दोषी अभिनेता राजपाल यादव को कड़ी फटकार लगाई है। सोमवार को अदालत ने आदेश के बावजूद तय रकम जमा नहीं करने को लेकर उनके रवैये पर नाराजगी जताई। राजपाल यादव को 2 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट पेश करना था, लेकिन सुनवाई के दौरान उनके वकील ने सिर्फ 50 लाख रुपये के ड्राफ्ट की कॉपी अदालत में दी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उन्हें पर्याप्त समय दिया गया था लेकिन आदेश का पालन नहीं हुआ।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ कर रही थी। अदालत ने कहा कि राजपाल यादव के आचरण से कोर्ट के प्रति सम्मान दिखाई नहीं दे रहा है। जस्टिस जोयमाल्या बागची ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि “आपकी जगह जेल में है।” कोर्ट ने यह भी कहा कि अब उनकी याचिका खारिज करने पर विचार किया जा सकता है।
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5 करोड़ रुपये जमा करने की थी शर्त
सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर को राजपाल यादव को जेल जाने से अंतरिम राहत दी थी। इसके बदले उन्हें कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा करने थे। इसके बाद 15 सितंबर को उनके वकील ने बताया था कि राजपाल यादव अपनी कुछ संपत्तियां बेचकर रकम जुटाने की कोशिश कर रहे हैं और अगली सुनवाई में 2 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट पेश किया जाएगा। इस आश्वासन के बाद अदालत ने अंतरिम राहत को 5 अक्टूबर तक बढ़ा दिया था।
सोमवार को जब सुनवाई हुई तो 2 करोड़ रुपये की जगह 50 लाख रुपये का ड्राफ्ट पेश किया गया। इस पर पीठ ने पूछा कि जब अदालत ने 5 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया था और बाद में 2 करोड़ रुपये देने की बात कही गई थी तो अब सिर्फ 50 लाख रुपये ही क्यों लाए गए।
“आप यहां भी अभिनय कर रहे हैं”
राजपाल यादव के वकील ने 50 लाख रुपये के भुगतान को उचित बताते हुए कहा कि शिकायतकर्ता आर्थिक रूप से कमजोर नहीं हैं। इस दलील पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई। जस्टिस जोयमाल्या बागची ने कहा कि शिकायतकर्ता कम से कम उतने हिस्से में गरीब हैं, जितनी रकम राजपाल यादव के पास फंसी हुई है। अदालत ने उनके रवैये को लेकर कहा कि इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जाएगा और टिप्पणी की “आप यहां भी अभिनय कर रहे हैं, लेकिन यह काम नहीं आएगा।” सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल राजपाल यादव को एक और मौका दिया है। मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी। इस दौरान अदालत उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई और याचिका के भविष्य पर फैसला कर सकती है।
2010 से चल रहा है विवाद
यह मामला लगभग 16 साल पुराना है। वर्ष 2010 में फिल्म “अता पता लापता” बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने राजपाल यादव, उनकी पत्नी और उनकी प्रोडक्शन कंपनी को लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था। फिल्म की रिलीज में देरी के बाद रकम लौटाने को लेकर दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ था। रकम लौटाने के लिए राजपाल यादव की ओर से जारी किए गए सात चेक बाउंस हो गए।
इसके बाद मुरली प्रोजेक्ट्स ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत सात अलग-अलग मामले दर्ज कराए। अप्रैल 2018 में ट्रायल कोर्ट ने राजपाल यादव को इन मामलों में दोषी ठहराया था। इसके बाद सेशंस कोर्ट में भी उन्हें राहत नहीं मिली। जुलाई 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने सातों मामलों में उनकी सजा बरकरार रखते हुए तीन महीने की जेल और जुर्माने का आदेश दिया। इसी फैसले के खिलाफ राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।