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आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित, राज्यों की निष्क्रियता और असम के आंकड़ों पर जताई गहरी नाराजगी

Written by:Gaurav Sharma
Published:
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर अपने पिछले आदेश में संशोधन की याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्यों द्वारा नसबंदी और आश्रय स्थल बनाने में ढिलाई पर कड़ी फटकार लगाई और असम में कुत्तों के काटने के चौंकाने वाले आंकड़ों पर चिंता व्यक्त की।
आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित, राज्यों की निष्क्रियता और असम के आंकड़ों पर जताई गहरी नाराजगी

नई दिल्ली: देश में आवारा कुत्तों से जुड़ी समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। यह मामला कोर्ट के उस पुराने आदेश में बदलाव की मांग से जुड़ा है, जिसमें आवारा जानवरों को सार्वजनिक जगहों से हटाने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजनिया की पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला लिया।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों की नसबंदी और उनके लिए आश्रय स्थल बनाने में राज्यों की धीमी प्रगति पर बेहद सख्त रुख अपनाया। बुधवार को हुई सुनवाई का जिक्र करते हुए पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है जैसे राज्य केवल ‘हवा में महल बना रहे हैं’ और उनकी दलीलें ‘कहानियों’ जैसी लग रही हैं।

असम के आंकड़ों पर कोर्ट हैरान

कोर्ट ने असम में कुत्तों के काटने के मामलों पर गहरी चिंता और आश्चर्य व्यक्त किया। न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) गौरव अग्रवाल ने पीठ को बताया कि राज्य में 2024 में कुत्तों के काटने के 1.66 लाख मामले सामने आए, जबकि वहां केवल एक ही डॉग सेंटर मौजूद है। यह भी बताया गया कि अकेले जनवरी 2024 में ही 20,900 लोगों को कुत्तों ने काटा। इन आंकड़ों को कोर्ट ने बेहद चिंताजनक माना।

न्याय मित्र ने आंध्र प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 39 एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) केंद्र हैं, जिनकी क्षमता रोजाना 1,619 कुत्तों की नसबंदी करने की है। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य को मौजूदा सुविधाओं का ऑडिट करना चाहिए और नए केंद्र स्थापित करने के लिए एक समय-सीमा तय करनी चाहिए।

पशु कल्याण बोर्ड को तेजी लाने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) को निर्देश दिया कि वह एनिमल शेल्टर या ABC केंद्र खोलने की अनुमति मांगने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGO) के आवेदनों पर तेजी से कार्रवाई करे।

“या तो आप आवेदन स्वीकार करें या खारिज करें, लेकिन इसे जल्दी करें।”-  सुप्रीम कोर्ट पीठ

AWBI के वकील ने बताया कि कोर्ट के पिछले आदेश के बाद ऐसे आवेदनों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। कोर्ट ने सभी पक्षों से अपनी लिखित दलीलें जल्द से जल्द दाखिल करने को कहा है।

क्या था कोर्ट का पुराना आदेश?

सुप्रीम कोर्ट अपने 7 नवंबर 2023 के आदेश में संशोधन की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। उस आदेश में कोर्ट ने शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसी सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए कई निर्देश दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद आवारा कुत्तों को उनकी पुरानी जगह पर छोड़ने के बजाय निर्धारित आश्रय स्थलों में भेजा जाए। इसके अलावा, राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से भी सभी मवेशियों और अन्य आवारा जानवरों को हटाने का निर्देश दिया गया था, जिसके पालन को लेकर NHAI के वकील ने भी अपनी दलीलें रखीं।

इससे पहले 13 जनवरी को कोर्ट ने यह भी संकेत दिया था कि वह कुत्तों के काटने की घटनाओं में राज्यों से ‘भारी मुआवजा’ दिलाने और ऐसे मामलों में कुत्तों को खाना खिलाने वालों की जवाबदेही तय करने पर भी विचार करेगा।