नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में नियमित पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर ममता बनर्जी सरकार पर तीखी टिप्पणी की है। अदालत ने इस मामले पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि राज्य सरकार को स्थायी डीजीपी की नियुक्ति से ज्यादा अपने अधिकारियों को राज्यसभा भेजने की चिंता है।

यह पूरा मामला तब सामने आया जब अदालत कई राज्यों द्वारा नियमित डीजीपी की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को समय पर प्रस्ताव न भेजने के मुद्दे पर सुनवाई कर रही थी।

CJI ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने कहा, “कई राज्य, खासकर पश्चिम बंगाल, नियमित डीजीपी की नियुक्ति के लिए समय पर प्रस्ताव नहीं भेज रहे हैं। इस वजह से वरिष्ठ और योग्य अधिकारियों के अवसर खत्म हो रहे हैं।” उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा कि बंगाल सरकार डीजीपी की नियुक्ति से ज्यादा अपने अधिकारियों को राज्यसभा भेजने में व्यस्त है।

“बंगाल सरकार DGP की नियुक्ति से ज्यादा उन्हें अपने अधिकारियों को राज्यसभा भेजने में व्यस्त है।”- चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत

यह टिप्पणी हाल ही में पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी राजीव कुमार के तृणमूल कांग्रेस (TMC) के टिकट पर निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद आई है। राजीव कुमार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सबसे भरोसेमंद अधिकारी माना जाता है।

UPSC और राज्य सरकार में खींचतान

फिलहाल, पीयूष पांडे राज्य के कार्यवाहक डीजीपी हैं। 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी पांडे ने राजीव कुमार के रिटायर होने के बाद 31 जनवरी 2026 को पदभार ग्रहण किया था। इससे पहले वह महानिदेशक (जेल) के पद पर तैनात थे।

स्थायी डीजीपी की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार और यूपीएससी के बीच लगातार खींचतान चल रही है। हाल ही में यूपीएससी ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए नामों के पैनल को यह कहते हुए वापस कर दिया था कि यह सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है।

TMC के राज्यसभा उम्मीदवार

बता दें कि तृणमूल कांग्रेस ने हाल ही में राज्यसभा के लिए चार उम्मीदवारों की घोषणा की थी, जिसमें पूर्व डीजीपी राजीव कुमार का नाम भी शामिल था। उनके अलावा बाबुल सुप्रियो, मेनका गुरुस्वामी और कोएल मल्लिक को भी उम्मीदवार बनाया गया था। राजीव कुमार निर्विरोध निर्वाचित हुए।