Wed, Jan 7, 2026

देश को मिला पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’, भारतीय तटरक्षक बल के बेड़े में शामिल, कोच्चि में रहेगा तैनात

Written by:Shyam Dwivedi
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 05 जनवरी 2026 (सोमवार) को दक्षिण गोवा के वास्को में स्थित गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) में देश के पहले स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ को औपचारिक रूप से भारतीय तटरक्षक बल (ICG) की सेवा में शामिल किया।
देश को मिला पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’, भारतीय तटरक्षक बल के बेड़े में शामिल, कोच्चि में रहेगा तैनात

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 05 जनवरी 2026 (सोमवार) को दक्षिण गोवा के वास्को में स्थित गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) में देश के पहले स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ को औपचारिक रूप से भारतीय तटरक्षक बल (ICG) की सेवा में शामिल किया। यह पोत गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित दो प्रदूषण नियंत्रण पोतों में से पहला है, जिसे स्वदेशी तकनीक और संसाधनों के उपयोग से विकसित किया गया है।

इस अवसर पर कार्यक्रम में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, दक्षिण गोवा के सांसद विरायटो फर्नांडिस समेत कई नेता और तटरक्षक बल के अधिकारी मौजूद रहे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘समुद्र प्रताप’ का नाम ही इसकी गरिमा और शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने गोवा शिपयार्ड लिमिटेड के इंजीनियरों और कामगारों की भी प्रशंसा की, जिन्होंने इस विशाल पोत को तैयार किया। रक्षा मंत्री ने भारतीय तटरक्षक बल के अधिकारियों और सैनिकों को बधाई देते हुए कहा कि वे समय, मौसम और परिस्थितियों की परवाह किए बिना देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में जुटे रहते हैं, जो अत्यंत सराहनीय है।

‘समुद्र प्रताप’ की खासियत

बता दें कि 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी घटकों से निर्मित, समुद्र प्रताप देश का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया प्रदूषण नियंत्रण पोत है और भारतीय तटरक्षक बल के बेड़े का अब तक का सबसे बड़ा पोत है। इसका डिस्प्लेसमेंट 4170 टन और लंबाई 150 मीटर है। इसकी अधिकतम गति 22 नॉटिकल मील प्रति घंटा होगी, जो इसकी परिचालन क्षमता को दर्शाती है।

इसमें उन्नत प्रदूषण डिटेक्शन सिस्टम, समर्पित प्रदूषण प्रतिक्रिया नौकाएं और आधुनिक अग्निशमन क्षमता मौजूद है। इसमें हेलीकॉप्टर हैंगर और एविएशन सपोर्ट की सुविधा भी है, जिससे इसकी पहुंच और प्रभावशीलता कई गुना बढ़ जाती है। इन क्षमताओं के कारण यह जहाज कठिन समुद्री परिस्थितियों में भी स्थायी रहकर काम कर सकता है और वास्तविक अभियानों में अत्यंत कारगर साबित होगा।

इसके साथ ही यह अत्याधुनिक तकनीक से लैस है, जिसमें 30 मिलीमीटर सीआरएन-91 गन, दो 12.7 मिलीमीटर स्थिरीकृत रिमोट-नियंत्रित गन, स्वदेशी एकीकृत ब्रिज सिस्टम, एकीकृत मंच प्रबंधन प्रणाली, स्वचालित ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली और उच्च क्षमता वाला बाहरी अग्निशमन तंत्र शामिल है।

समुद्र प्रताप की तैनाती

बता दें कि यह जहाज कोच्चि में तैनात रहेगा और तटरक्षक क्षेत्र (पश्चिम) के कमांडर के परिचालन नियंत्रण में रहेगा, जिसका संचालन तटरक्षक जिला मुख्यालय संख्या 4 (केरल और माहे) के माध्यम से किया जाएगा।