
UGC Notice: विधवविद्यालय अनुदान आयोग ने विश्वविद्यालय और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) को वैकल्पिक विषय के रूप में पेश करने के लिए महत्त्वपूर्ण दिशा निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने नोटिफिकेशन जारी करते हुए विश्वविद्यालय को कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर काम करने की सलाह दी है। साथ ही HEI को पाठ्यक्रम में एनसीसी को एक वैकल्पिक विषय के रूप में पेश करने के लिए उचित उपाय करने का आग्रह किया है।
विश्वविद्यालय जरूर करें ये काम, यूजीसी का निर्देश
नोटिस में आयोग ने कहा कि एनसीसी को वैकल्पिक विषय के रूप में सिर्फ उन्हीं छात्रों को ऑफर किया जा सकता है, जिन्होंने एनसीसी कैडेट के रूप में नामांकन करवाया हो इसके अलावा उच्च शिक्षा संस्थानों को राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) सैनिकों के साथ संबद्धता रखने की सलाह भी दी गई है। यूजीसी ने कॉलेज और विश्वविद्यालयों को इस संबंध में उचित कदम उठाने का आग्रह भी किया है।
2021 में पाठ्यक्रम में जुड़ा था विषय
शैक्षणिक वर्ष 2021 में यूजीसी ने एनसीसी सैनिकों वाले भारत के सभी विश्वविद्यालय में एनसीसी क्रेडिट पाठ्यक्रम को शुरू करने की मंजूरी प्रदान की थी। ऐसे प्राइवेट कॉलेजों के पाठ्यक्रम में इस विषय को शामिल करने की अनुमति दी गई थी, जहां पूर्ण स्ववित्तपोषित योजना के तहत एससीसी आवंटित किया गया है। 15 अप्रैल को यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालय के कुलपतियों को इस विषय में महत्वपूर्ण गाइडलाइन भी जारी की थी। इस विषय को शुरू का उद्देश्य युवाओं को राष्ट्रीय निर्माण के लिए प्रतोत्साहित करना है।
सिलेबस और एनसीसी सर्टिफिकेट के फायदे
एनसीसी ए, बी और सी सर्टिफिकेट के लिए एनसीसी सिलेबस को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम के आधार पर डिजाइन किया गया है। जिसमें 6 सेमेस्टर के लिए 24 क्रेडिट पॉइंट्स प्रदान किए जाते हैं। ऐसे में छात्र विभिन्न केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत दिए जाने वाले रोजगार और सुविधाओं का लाभ भी उठा सकते हैं। एनसीसी सर्टिफिकेट की मदद से सरकारी नौकरी में छूट का लाभ भी उठा सकते हैं। एनसीसी पाठ्यक्रम डिजाइन का व्यापक विवरण CCNS वेबसाइट पर उपलब्ध है।
लेखक के बारे में
पत्रकारिता जनकल्याण का माध्यम है। एक पत्रकार का काम नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है। ताकि उस जानकारी का इस्तेमाल मानव की स्थिति को सुधारने में हो सकें। देश और दुनिया धीरे–धीरे बदल रही है। आधुनिक जनसंपर्क का विस्तार भी हो रहा है। लेकिन एक पत्रकार का किरदार वैसा ही जैसे आजादी के पहले था। समाज के मुद्दों को समाज तक पहुंचाना। स्वयं के लाभ को न देख सेवा को प्राथमिकता देना यही पत्रकारिता है।
अच्छी पत्रकारिता बेहतर दुनिया बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए भारतीय संविधान में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ बताया गया है। हेनरी ल्यूस ने कहा है, " प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है और न ही यह कोई पेशा है।" पत्रकारिता समाजसेवा है और मुझे गर्व है कि "मैं एक पत्रकार हूं।" View all posts by Manisha Kumari Pandey →

