नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने केरल के नाम को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है, जो राज्य की एक लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई। इस निर्णय को राज्य की सांस्कृतिक और भाषाई विरासत के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार के इस कदम के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आनी शुरू हो गई हैं। सत्ता पक्ष ने जहां इसे ऐतिहासिक बताया है, वहीं कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसका समर्थन करते हुए एक अनोखा सवाल उठाया है।
सरकार और भाजपा नेताओं ने क्या कहा?
इस फैसले पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “केरलम के लोगों को हार्दिक बधाई। मोदी जी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का निर्णय राज्य के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ‘केरलम’ नाम राज्य की विरासत को उसकी पूरी प्रामाणिकता के साथ प्रकट करेगा और उसके गौरव को बरकरार रखेगा।”
वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने इस निर्णय को सांस्कृतिक पहचान का सम्मान बताया।
“पीएम मोदी के नेतृत्व में ‘केरल’ का नाम ‘केरलम’ करने की केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी केरल के लोगों की भाषाई विरासत और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह निर्णय औपनिवेशिक युग के नामकरण के अवशेषों से आगे बढ़ने और भारत की सभ्यता की जड़ों और मूल परंपराओं में गौरव बहाल करने के राष्ट्रीय संकल्प को दर्शाता है।”- नितिन नबीन, भाजपा नेता
शशि थरूर का दिलचस्प भाषाई सवाल
तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस फैसले की सराहना की लेकिन एक भाषाई दुविधा को भी सामने रखा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अब राज्य के निवासियों के लिए इस्तेमाल होने वाले अंग्रेजी शब्दों ‘Keralite’ और ‘Keralan’ का क्या होगा?
उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा: “सब कुछ अच्छा है, इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन हमारे बीच मौजूद एंग्लोफोन्स के लिए एक छोटा सा भाषाई सवाल: अब नए ‘केरलम’ के निवासियों के लिए ‘Keralite’ और ‘Keralan’ शब्दों का क्या होगा? ‘केरलमाइट’ (Keralamite) एक microbe (सूक्ष्म जीव) की तरह लगता है और ‘केरलमियन’ (Keralamian) एक दुर्लभ मिनरल की तरह लगता है।”
अब आगे क्या होगी प्रक्रिया?
कैबिनेट की मंजूरी इस प्रक्रिया का पहला कदम है। अब इसके बाद राष्ट्रपति इस विधेयक (केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026) को अपने विचार व्यक्त करने के लिए केरल राज्य विधानसभा को भेजेंगी। राज्य विधानसभा से राय मिलने के बाद, सरकार आगे की कार्रवाई करेगी। अंतिम चरण में संसद में विधेयक पेश करने के लिए राष्ट्रपति की सिफारिश प्राप्त की जाएगी और संसद के दोनों सदनों से पास होने के बाद यह कानून बन जाएगा।





