उत्तर प्रदेश में एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा किए जाने और इनके जरिए मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रूख अपनाया है। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने चुनाव आयोग को शिकायतों की जांच करने, आवश्यक कदम उठाने और इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा कि उत्तर प्रदेश में जिन गड़बड़ियों की शिकायत की जा रही है उनका पूरा ब्योरा चुनाव आयोग को दिया जाए। इसी से साथ चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि इन शिकायतों की जांच कर आवश्यक सुधार करे और अदालत में अपनी रिपोर्ट पेश करे।
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एक विधानसभा क्षेत्र में 32 फॉर्म जमा करने का आरोप
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उत्तर प्रदेश के एक विधानसभा क्षेत्र में एक विशेष समुदाय के लोगों के नाम मतदाता सूची से हटवाने के लिए 32 फॉर्म-7 जमा किए गए थे। इनमें से दो फॉर्म पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के हस्ताक्षर होने की बात भी कही गई। वकील ने अदालत को बताया कि 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और केरल में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा किए जाने की शिकायतों पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा था। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ और केरल के मामलों में जांच के बाद शिकायतों का समाधान हो गया, लेकिन उत्तर प्रदेश का मामला अब भी लंबित है। याचिकाकर्ता ने तेलंगाना और कर्नाटक में ऐसी शिकायतों पर एफआईआर दर्ज किए जाने का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश में कार्रवाई नहीं होने का मुद्दा भी उठाया।
चुनाव आयोग ने क्या कहा
चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने कहा कि छत्तीसगढ़ और केरल में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा किए जाने की जांच की गई थी। जांच में आवेदन गलत पाए गए और उनके आधार पर किसी भी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया गया। उत्तर प्रदेश के मामले में आयोग ने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में गड़बड़ी की शिकायत है तो उसके तथ्य आयोग को उपलब्ध कराए जाएं। आयोग उनकी जांच करेगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को शिकायतों का विवरण देने और चुनाव आयोग को उनकी जांच कर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
केरल में समयसीमा बढ़ाने से इनकार
इसी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केरल में SIR की समयसीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया था कि कुछ लोगों को अब भी मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या उसमें सुधार कराने की जरूरत है। इस पर अदालत ने कहा कि ऐसे लोग चुनाव आयोग के पास आवेदन कर सकते हैं और आयोग उनके मामलों की जांच करेगा।
