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ईरान-अमेरिका तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने PM मोदी से फोन पर की बात, होर्मुज और मिडिल ईस्ट हालातों पर हुई अहम बातचीत

Written by:Gaurav Sharma
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ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की। इस बातचीत का मुख्य केंद्र मध्य-पूर्व के हालात और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के विकल्पों पर चर्चा करना था। पीएम मोदी इससे पहले भी ईरान और इजरायल समेत कई खाड़ी देशों के नेताओं से शांति बहाली पर चर्चा कर चुके हैं।
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने PM मोदी से फोन पर की बात, होर्मुज और मिडिल ईस्ट हालातों पर हुई अहम बातचीत

मध्य-पूर्व में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव 25वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिससे पूरी दुनिया पर आर्थिक संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ईरान द्वारा सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किए जाने से वैश्विक तेल और गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसी गंभीर होती स्थिति के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर संपर्क साधा।

यह जंग छिड़ने के बाद दोनों नेताओं के बीच पहली आधिकारिक बातचीत है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने इस वार्ता की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों नेताओं के बीच मध्य-पूर्व की मौजूदा स्थिति और वैश्विक व्यापार के लिए अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के विकल्पों पर गंभीर चर्चा हुई।

शांति बहाली के लिए भारत की सक्रिय भूमिका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस संकट को टालने के लिए लगातार कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय हैं। ट्रंप से बातचीत से पहले वह ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी बात कर चुके हैं। इसके अलावा, पीएम मोदी ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और बहरीन समेत खाड़ी क्षेत्र के अन्य सभी प्रमुख नेताओं से संवाद स्थापित किया है।

उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए शांति स्थापित करने की अपील की है। भारत का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को मानवता के हित में संवाद के जरिये खोला जाना चाहिए, ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला बाधित न हो।

ईरान के कड़े रुख से बढ़ी चिंता

तमाम अंतरराष्ट्रीय दबाव और अमेरिकी धमकियों के बावजूद ईरान अपने रुख पर कायम है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उसकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वह अमेरिका और इजरायल के सहयोगी देशों के किसी भी जहाज को होर्मुज से एक बूंद तेल भी नहीं ले जाने देगा।

ईरान के इस कदम से एशिया से लेकर यूरोप तक कई देशों में तेल और गैस की भारी किल्लत हो गई है, जिसका सीधा असर आम जन-जीवन पर पड़ रहा है। इस वैश्विक संकट के समाधान में भारत की भूमिका को अहम माना जा रहा है, और ट्रंप-मोदी की बातचीत इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma
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