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लोकसभा में केंद्र सरकार ट्रांसजेंडर और CAPF समेत 4 अहम बिलों पर करेगी चर्चा, जानें किस बिल पर कितने घंटे होगी बहस

Written by:Ankita Chourdia
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केंद्र सरकार लोकसभा में बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान चार महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा करने जा रही है। इनमें ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, CAPF विधेयक, दिवाला और दिवालियापन संहिता संशोधन विधेयक और FCRA संशोधन विधेयक शामिल हैं, जिनके लिए बिजनेस एडवाइजरी कमेटी ने समय भी निर्धारित कर दिया है।
लोकसभा में केंद्र सरकार ट्रांसजेंडर और CAPF समेत 4 अहम बिलों पर करेगी चर्चा, जानें किस बिल पर कितने घंटे होगी बहस

संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण चल रहा है और आने वाले दिनों में लोकसभा में चार महत्वपूर्ण विधेयकों पर गहन चर्चा होने वाली है। केंद्र सरकार इन बिलों को पारित कराने की तैयारी में है, जिनमें ट्रांसजेंडर समुदाय से लेकर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से जुड़े अहम बदलाव शामिल हैं। लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में इन सभी बिलों पर बहस के लिए समय भी निर्धारित कर दिया गया है।

यह सत्र 28 जनवरी को शुरू हुआ था और 2 अप्रैल तक चलेगा। इसका पहला भाग 13 फरवरी को समाप्त हो गया था, जिसके बाद 9 मार्च से दूसरा भाग शुरू हुआ है। इसी चरण में सरकार इन चार प्रमुख विधेयकों को सदन के पटल पर रखेगी।

इन 4 बिलों पर होगी चर्चा

सरकार जिन चार विधेयकों पर चर्चा करने वाली है, उनमें पहला ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026’ है। इस पर बहस के लिए 3 घंटे का समय तय किया गया है। इस संशोधन विधेयक में ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषा को सीमित करने का प्रस्ताव है, जिसमें स्व-पहचान वाले ट्रांसजेंडर व्यक्ति शामिल नहीं होंगे। इसके अतिरिक्त, यह 2019 के कानून के अनुच्छेद 4(2) को हटाने का भी प्रस्ताव करता है।

दूसरा अहम बिल ‘केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) विधेयक’ है, जिस पर सबसे ज्यादा यानी 6 घंटे की चर्चा होगी। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य BSF, CRPF, ITBP और CISF जैसे केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में महानिरीक्षक (IG) और उससे ऊपर के पदों पर नियुक्ति, प्रतिनियुक्ति, पदोन्नति और सेवा के नियमों को सुव्यवस्थित और स्पष्ट करना है।

बैंकरप्सी और FCRA संशोधन विधेयक भी कतार में

इसके अलावा, ‘दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक’ पर भी चर्चा की जाएगी, जिसके लिए 4 घंटे का समय आवंटित किया गया है। यह विधेयक कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में सुधार लाने पर केंद्रित है।

चौथा और अंतिम विधेयक ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक, 2026’ है। इस पर बहस के लिए 3 घंटे का समय निर्धारित हुआ है। FCRA कानून विदेशों से मिलने वाले चंदे को नियंत्रित करता है, और इस संशोधन से इसके नियमों में और बदलाव होने की उम्मीद है।

क्या है BAC, जो तय करती है समय?

खबर में बार-बार BAC का जिक्र आया है, जिसने इन बिलों पर चर्चा का समय तय किया है। BAC का पूरा नाम बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (कार्य मंत्रणा समिति) है। यह सांसदों का एक पैनल होता है, जिसका गठन संसद के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने में मदद के लिए किया जाता है। यह समिति तय करती है कि सरकारी विधेयकों और अन्य कार्यों के लिए सदन में कितना समय दिया जाना चाहिए। यह केवल उन विधेयकों पर विचार करती है जिन्हें सभापति द्वारा इसके पास भेजा जाता है।

Ankita Chourdia
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