मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने किसानों के मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र लिखा है और उसमें उन्होंने मांग की है कि किसानों की ऋण वसूली की अंतिम तिथि 31 मार्च के स्थान पर स्थायी रूप से 30 अप्रैल निर्धारित की जाए। सिंघार ने गेहूं की खरीदी 3000/- रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर करने की भी मांग की है।
उमंग सिंघार ने आज 24 मार्च को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को एक पत्र लिखा है कि प्रदेश के किसान इस समय आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। प्रदेश में सरकार द्वारा गेहूं खरीदी की प्रक्रिया 01 अप्रैल से “भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) तथा सहकारी समितियों के माध्यम से प्रारंभ की जाती है। ऐसी स्थिति में किसानों के लिए 31 मार्च तक ऋण जमा करना अत्यंत कठिन हो जाता है।
सिंघार ने बताया कि पहले किसानों के ऋण की वसूली की अंतिम तिथि 30 अप्रैल तक रहती थी, जिससे किसानों को अपनी फसल बेचकर ऋण चुकाने का पर्याप्त समय मिल जाता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में अंतिम तारीख 31 मार्च कर दी गई, जिसके कारण अनेक किसान समय पर ऋण जमा नहीं सके और अनजाने में डिफाल्टर घोषित हो गए।
उमंग सिंघार ने की ये मांग
- किसानों की ऋण वसूली की अंतिम तिथि 31 मार्च के स्थान पर स्थायी रूप से 30 अप्रैल निर्धारित की जाए। जो किसान तिथि परिवर्तन के कारण डिफाल्टर घोषित हो गए हैं, उन्हें राहत प्रदान करते हुए उनका कर्ज माफ किया जाए या विशेष छूट दी जाए।
- राज्य सरकार द्वारा चुनाव पूर्व घोषणा अनुसार किसानों से 3000/- रुपये प्रति क्विंटल के भाव से गेहूं की खरीदी प्रारंभ की जाए। किसानों को एम.एस.पी. पर समय पर गेहूं खरीदी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
गेहूं की MSP पर कांग्रेस के निशाने पर है सरकार
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस लंबे समय से प्रदेश की भाजपा सरकार को गेहूं की एमएसपी पर घेर रही है, कांग्रेस का कहना है कि भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में 3000 रुपये क्विंटल का वादा किया था जो अभी तक पूरा नहीं हुआ है, नेता प्रतिपक्ष ने एक बार फिर मुख्यमंत्री को वही वादा याद दिलाया है






