मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस बीजेपी सरकार पर हमलावर है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने ओबीसी आरक्षण मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की सख्ती पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रोज़ाना सुनवाई और अदालत का रुख यह साफ संकेत है कि मामला बेहद गंभीर हो चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार ने ओबीसी वर्ग को उनका अधिकार दिलाने के लिए ठोस निर्णय लिया था, लेकिन इसके बाद भाजपा सरकार ने इस मुद्दे को टालमटोल और लापरवाही का शिकार बना दिया। उन्होंने कहा कि आज लाखों पिछड़े वर्ग के युवा भर्ती, परीक्षा और अपने भविष्य को लेकर असमंजस में खड़े हैं जबकि सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।
ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट का सख्य रूख
बता दें कि सोमवार को हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं को एक साथ लिंक करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने सभी पक्षों को 2 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने का समय दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 16 अप्रैल से इस मामले की फास्ट ट्रैक सुनवाई शुरू होगी, जिसे अंतिम सुनवाई माना जाएगा। लगभग 6 साल से लंबित इस मामले में सामान्य वर्ग की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने जल्द निर्णय देने के संकेत दिए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ देरी के उद्देश्य से दायर हस्तक्षेप याचिकाओं को नहीं सुना जाएगा, ताकि सुनवाई में अनावश्यक बाधा न आए। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट इस मामले को हाईकोर्ट को वापस भेजते हुए अंतिम निर्णय का अधिकार उसे दे चुका है।
उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार को घेरा
अब नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। हाईकोर्ट के नए आदेश को लेकर उन्होंने कहा कि कोर्ट की सख्ती और फास्ट ट्रैक सुनवाई साफ संकेत है कि मामला कितना गंभीर हो चुका है। उन्होंने कहा कि असली सवाल यह है इसके लिए जिम्मेदार कौन है? कांग्रेस नेता ने कहा कि “पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जी की सरकार ने ओबीसी वर्ग को उनका हक दिलाने के लिए ठोस निर्णय लिया था। लेकिन भाजपा सरकार सत्ता में आते ही इसे जानबूझकर टालमटोल और लापरवाही का शिकार बना दिया।”
उन्होंने कहा कि आज लाखों पिछड़े वर्ग के युवा भर्तियों, परीक्षाओं और अपने भविष्य को लेकर असमंजस में खड़े हैं और सरकार सिर्फ तमाशा देख रही है। उमंग सिंघार ने कहा कि आरक्षण कोई राजनीति का विषय नहीं, यह संवैधानिक अधिकार और सामाजिक न्याय का सवाल है। लेकिन भाजपा ने इसे भी अपना राजनीतिक हथियार बना लिया। उन्होंने कहा अब प्रदेश की जनता जानना चाहती है ओबीसी वर्ग को उनका हक कब मिलेगा और सरकार इस अन्याय की जिम्मेदारी कब स्वीकार करेगी।






