विपक्षी गठबंधन इंडिया ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए आंध्र प्रदेश के पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुधर्शन रेड्डी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। इस कदम से विपक्ष ने आंध्र प्रदेश की क्षेत्रीय भावनाओं को भुनाने की कोशिश की, ताकि बीजेपी की सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी (TDP) पर दबाव बनाया जा सके। हालांकि, टीडीपी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के साथ है। टीडीपी महासचिव और आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश ने कहा, “कोई असमंजस नहीं है। केवल एकजुटता और सम्मान है। एनडीए एकजुट है।”
टीडीपी बीजेपी की महत्वपूर्ण सहयोगी है और इसकी मदद से नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले लोकसभा चुनाव के बाद तीसरा कार्यकाल हासिल किया। विपक्ष की रणनीति थी कि आंध्र के उम्मीदवार को चुनकर टीडीपी को असमंजस में डाला जाए, जैसा कि बीजेपी ने तमिलनाडु की डीएमके के साथ तमिल उम्मीदवार को चुनकर किया। हालांकि, टीडीपी और डीएमके दोनों ने क्षेत्रीय भावनाओं के बजाय राजनीतिक गठबंधन को प्राथमिकता दी है।
782 सदस्यों का निर्वाचक मंडल
उपराष्ट्रपति चुनाव में 782 सदस्यों का निर्वाचक मंडल हिस्सा लेता है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सांसद शामिल हैं। जीत के लिए 392 वोटों की जरूरत है। एनडीए के पास लोकसभा में 293 और राज्यसभा में 133 सीटें हैं जिससे बीजेपी के उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है। केवल एनडीए के कुछ सदस्यों के बगावत करने पर ही विपक्ष को मौका मिल सकता है जो फिलहाल असंभव लगता है।
विपक्ष की क्या रणनीति
विपक्ष का यह कदम मुख्य रूप से प्रतीकात्मक है, ताकि बीजेपी को आसान जीत न मिले। बी. सुधर्शन रेड्डी के चयन ने चुनावी मुकाबले को रोचक बना दिया है। विपक्ष इस चुनाव के जरिए अपनी एकजुटता दिखाने और सरकार पर चुनावी अनियमितताओं जैसे मुद्दों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।





