पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Election 2026) नजदीक है। बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस समेत सभी पार्टियां तैयारियों में जुटी हुई हैं। इसी बीच एक और राजनीतिक हलचल देखने को मिली है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेता प्रतिकुर रहमान (Pratikur Rahaman) 21 फरवरी को अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में टीएमसी में शामिल हो चुके हैं।
पार्टी स्टेट कमेटी के सदस्य प्रतिकुर रहमान के तृणमूल कॉंग्रेस में शामिल होते ही सीपीआई (M) बयान जारी किया है। गंभीर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और दुश्मन के साथ हाथ मिलने के कारण तुरंत पार्टी से निकाल दिया गया है।
CPI (M) की क्रांति सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित- अभिषेक बनर्जी
टीएमसी के नेशनल जनरल सेक्रेटरी अभिषेक बनर्जी ने प्रतिकुर रहमान का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि, “बंगाल में सीपीआई (एम) की क्रांति आज केवल सोशल मीडिया टाइमलाइन और टेलीविजन डिबेट में जिंदा है। वे लोग लोगों के बीच या सड़कों पर एक्टिव नहीं है।” आगे उन्होंने कहा,”प्रतिकुर रहमान उन गिने-चुने लोगों में से एक थे, जो लोगों से जुड़े और जमीनी स्तर पर लड़ाइयां लड़ी। टीएमसी में शामिल होने का उनका फैसला मौकापरस्ती नहीं है, यह एक सूची समझी और उसूलों वाली पसंद है।”
वाम दल पर बीजेपी के साथ वोट शेयर का आरोप
अभिषेक बनर्जी ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) पर अनेक सवाल उठाए। इसके अलावा बीजेपी के साथ 35% वोट शेयर करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि, “वे नैतिकता और सिद्धांतों का दावा करते हैं। लेकिन जब राजनीतिक सुविधाओं का सवाल आता है, तो सिद्धांत कहां गायब हो जाते हैं? जो पार्टी दूसरों को ईमानदारी पर लेक्चर देता है, वे अपने 35% वोट शेयर को बीजेपी को ट्रांसफर करने को कैसे समझ सकती है? इसलिए इसलिए उन्हें पवित्रता का उपदेश देने का अधिकार नहीं है।”
कौन है प्रतिकुर रहमान?
टीएमसी ज्वाइन करने से पहले प्रतीकुर रहमान सीपीआई (एम) स्टेट कमेटी के सदस्य थे। पार्टी छात्र शाखा स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्होंने 2021 में डायमंड हार्बर में विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन टीएमसी उम्मीदवार पन्नालाल हलदर की जीत हुई। इस दौरान वह 38,719 वोट के साथ तीसरे नंबर पर रहे। 2024 उन्होंने डायमंड हार्बर सीट पर अभिषेक बनर्जी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ा था।
In Bengal, the CPI(M)’s “revolution” today survives largely on social media timelines and television debates, not on the streets, not among the people.
Shri Pratikur Rahaman was one of the rare few who actually stepped out, engaged with citizens, and fought real battles on the… pic.twitter.com/avkQUD6aD4
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) February 21, 2026






