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World Never Give Up Day: कोशिश करने वालों की हार नहीं होती, जानिए जीवटता और संघर्ष की अनोखी कहानियां

जीवन है तो चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों के बीच अपने हौसले को बनाए रखना ही असली जीत है। आज का दिन उन जिंदादिल कोशिशों को सलाम करता है जिन्होंने मुश्किल हालात के बावजूद लोगों को आगे बढ़ने का हौसला दिया। संघर्ष, सफलता और असफलताओं के बीच "हार न मानना" ही वो जज़्बा है जो हमें फिर खड़े होने की ताकत देता है।
World Never Give Up Day

World Never Give Up Day

जिंदगी में मुश्किलें हर किसी के सामने आती हैं..लेकिन मुश्किलों के बीच भी आगे बढ़ते रहने की भावना इंसान को खास बनाती है। इसी दृढ़ता, उम्मीद और संघर्ष की भावना को सम्मान देने के लिए हर साल 18 अगस्त को ‘वर्ल्ड नेवर गिव अप डे’ (World Never Give Up Day) मनाया जाता है। यह दिन लोगों को याद दिलाता है कि असफलता किसी यात्रा का अंत नहीं, बल्कि दोबारा कोशिश करने का मौका भी हो सकती है।

यह दिन खासतौर पर उन लोगों के लिए प्रेरणा का संदेश है जो किसी व्यक्तिगत परेशानी, आर्थिक संकट, बीमारी, असफलता, करियर की चुनौती या किसी बड़े लक्ष्य के रास्ते में संघर्ष कर रहे हैं। इसके मूल में यही बात है कि मुश्किल चाहे कितनी भी बड़ी हो, कोशिश करना बंद नहीं करना चाहिए।

कैसे हुई World Never Give Up Day की शुरुआत

नेवर गिव अप डे की शुरुआत 2019 में अलैन होरोइट ने की, जिन्हें “मिस्टर नेवर गिव अप” के नाम से भी जाना जाता है।बेल्जियम निवासी अलैन ने बीस साल तक अपना व्यवसाय खड़ा किया लेकिन फिर बड़ी असफलता का सामना किया दिसमें वे दिवालिया तक हो गए। उन्होंने लगभग सब कुछ खो दिया लेकिन फिर भी हार नहीं मानी। अपनी इस यात्रा से प्रेरित होकर उन्होंने यह दिन शुरू किया। शुरुआत में यह एक साधारण बीच इवेंट था लेकिन 2022 के बाद यह तेजी से बढ़ा। अब अमेरिका और कनाडा के 137 से ज्यादा शहरों ने आधिकारिक तौर पर 18 अगस्त को नेवर गिव अप डे घोषित कर दिया है। 2025 में नेशनल डे कैलेंडर ने भी इसे मान्यता दी और नाम में “वर्ल्ड” जोड़ा गया ताकि इसका वैश्विक स्वरूप उजागर हो।

इसे मनाने के लिए 18 अगस्त का चुनाव शुरू में संयोगवश हुआ था, लेकिन बाद में इसमें खास महत्व जुड़ गया। 18 अगस्त 2012 को फ्रांसीसी तैराक फिलिप क्रॉइजॉन ने चारों अंगों के बिना पांच महाद्वीपों को तैरकर जोड़ने की अद्भुत उपलब्धि पूरी की थी। इसके अलावा, 1845 में प्रकाशित एक कविता “Never Give Up” से भी इस तारीख का जुड़ाव बताया जाता है।

इस दिन का उद्देश्य

इस दिन का सबसे बड़ा उद्देश्य लोगों में दृढ़ता, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना है। इसका संदेश सिर्फ बड़े सपने देखने वालों के लिए नहीं है, बल्कि उन लोगों के लिए भी है जो रोजमर्रा की जिंदगी में छोटी-बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ये दिन याद दिलाता है कि असफलता के बाद दोबारा प्रयास करना कभी नहीं छोड़ना चाहिए। ये कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे लोगों का मनोबल बढ़ाने, संघर्ष और उपलब्धि के पीछे छिपी मेहनत को पहचानने और लोगों को अपनी व्यक्तिगत कहानियां साझा करने के लिए प्रोत्साहित करने का भी अवसर है। इस दिन का महत्व इसलिए भी है कि हमें याद रहे कि सफलता सिर्फ परिणाम का नाम नहीं, बल्कि उस यात्रा का भी नाम है जिसमें व्यक्ति हार मानने से इनकार करता है।

 Never Give Up की असली प्रेरक कहानियां

फिलिप क्रॉइजॉन: चारों अंग गंवाए, फिर भी समुद्र में उतरे

फ्रांस के फिलिप क्रॉइजॉन की कहानी इस दिन से सीधे जुड़ी हुई है। एक दुर्घटना के बाद उन्होंने अपने चारों अंग गंवा दिए थे। इसके बावजूद उन्होंने तैराकी को अपनी ताकत बनाया। उन्होंने कृत्रिम अंगों की सहायता से तैराकी की और दुनिया को दिखाया कि शारीरिक सीमाएं हमेशा सपनों की सीमा नहीं होतीं। उनके अभियान में पांच महाद्वीपों को समुद्र के रास्ते जोड़ने का प्रयास शामिल था। 18 अगस्त की तारीख को Never Give Up Day से जोड़ने के पीछे उनकी यही असाधारण दृढ़ता एक प्रमुख प्रेरणा मानी जाती है।

अलैन होरोइट: सब कुछ खोने के बाद बनाया एक आंदोलन

World Never Give Up Day के संस्थापक अलैन होरोइट की अपनी जिंदगी भी इसी संदेश की मिसाल है। उनकी वेबसाइट के अनुसार, करीब 20 साल तक व्यवसाय खड़ा करने के बाद उन्हें दिवालियापन का सामना करना पड़ा और उन्होंने अपना सब कुछ खो दिया। लेकिन उन्होंने इसे अपनी कहानी का अंत नहीं माना। उन्होंने दूसरों की संघर्ष और सफलता की कहानियों को पढ़ना शुरू किया और ‘Never Give Up’ के संदेश को लोगों तक पहुंचाने का काम शुरू किया। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से इस विचार को आगे बढ़ाया और इस आंदोलन की शुरुआत की।

डेनिस हेस: एक छात्र से शुरू हुआ Earth Day का आंदोलन

पर्यावरण के क्षेत्र में डेनिस हेस की कहानी भी इसी भावना को समझाती है। 1969 में वह 25 साल के ग्रेजुएट छात्र थे, जब उन्हें पर्यावरण आंदोलन के लिए राष्ट्रीय अभियान आयोजित करने की जिम्मेदारी मिली। उनके प्रयासों से 22 अप्रैल 1970 को पहले Earth Day में अमेरिका में 2 करोड़ से ज्यादा लोग शामिल हुए। इसके बाद पर्यावरण संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण अमेरिकी कानूनों और संस्थागत बदलावों को गति मिली।

रोजमर्रा के कई अनदेखे योद्धा हैं इस दिन के नायक

World Never Give Up Day की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें सिर्फ सेलिब्रिटी या इतिहास बदलने वाले लोगों को ही शामिल नहीं किया जाता। ये दिन किसी भी आम व्यक्ति के जीवन से जुड़ा हो सकता है। छात्र, माता-पिता, शिक्षक, स्वास्थ्यकर्मी, समाजसेवी, खिलाड़ी, आंदोलनकारी और उद्यमियों सहित लाखों लोग इस दिन की वास्तविक कहानियों में शामिल हैं। इन सबकी जीवटता और दृढ़ता इस दिन की मूल भावना को व्यक्त करती हैं। ये दिन किसी एक देश, भाषा या वर्ग तक सीमित नहीं है। यह उस मानवीय भावना का उत्सव है जो कई मुश्किलों के बावजूद कहती है “एक कोशिश और।”

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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