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विश्व सिकल सेल दिवस: जागरूकता, स्क्रीनिंग और सहयोग से संभव है उन्मूलन, सीएम डॉ. मोहन यादव ने की ये अपील

Written by:Shruty Kushwaha
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यह दिन इस गंभीर बीमारी के खिलाफ एकजुट होने और प्रभावित लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करता है। जागरूकता, स्क्रीनिंग और उचित उपचार के माध्यम से इस रोग के बोझ को कम किया जा सकता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि वैश्विक सहयोग और सामूहिक प्रयासों से ही हम एक स्वस्थ और समावेशी दुनिया का निर्माण कर सकते हैं।
विश्व सिकल सेल दिवस: जागरूकता, स्क्रीनिंग और सहयोग से संभव है उन्मूलन, सीएम डॉ. मोहन यादव ने की ये अपील

आज विश्व सिकल सेल दिवस है। हर साल 19 जून को ये दिन सिकल सेल रोग के बारे में जागरूकता फैलाने, प्रभावित लोगों के लिए समर्थन जुटाने और इस बीमारी से निपटने के लिए वैश्विक प्रयासों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मनाया जाता है। यह दिन न इस जेनेटिक ब्लड डिसऑर्डर के प्रति लोगों को शिक्षित करने का अवसर देता है।

आज के दिन सीएम मोहन यादव ने सभी से इस रोग के उन्मूलन के लिए योगदान देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ‘सिकल सेल रोग उन्मूलन के राष्ट्रीय संकल्प को मध्यप्रदेश दृढ़ता से साकार कर रहा है। इस दिशा में हमारे राज्य ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त की हैं। आइए, विश्व सिकल सेल रोग जागरूकता दिवस पर संकल्प लें कि इसके उन्मूलन के प्रयासों में योगदान देकर स्वस्थ मध्यप्रदेश के निर्माण में सहभागी बनेंगे।’

विश्व सिकल सेल दिवस का इतिहास

विश्व सिकल सेल दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 22 दिसंबर 2008 को की गई, जब इसने 19 जून को आधिकारिक रूप से सिकल सेल बीमारी के प्रति जागरूकता दिवस घोषित किया। यह निर्णय अफ्रीकी देशों की पहल पर लिया गया, जहां ये बीमारी ज्यादा होती है। संयुक्त राष्ट्र ने इस बीमारी को एक वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में स्वीकार किया और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ये दिन मनाने का निर्णय लिया गया। इस दिन का मुख्य उद्देश्य सिकल सेल रोग के बारे में जागरूकता फैलाना, प्रभावित लोगों और उनके परिवारों को समर्थन देना, और इस आनुवंशिक रक्त विकार से निपटने के लिए वैश्विक प्रयासों को बढ़ावा देना है।

सिकल सेल रोग क्या है

सिकल सेल रोग एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जो हीमोग्लोबिन के असामान्य रूप के कारण होता है। इस रोग में लाल रक्त कोशिकाएं अपनी सामान्य गोल आकृति के बजाय हंसिया (Sickle) जैसी बन जाती हैं। ये असामान्य कोशिकाएं रक्त वाहिकाओं में अटक सकती हैं, जिससे रक्त प्रवाह में बाधा आती है है और शरीर के विभिन्न हिस्सों में दर्द, संक्रमण और अन्य समस्याएं पैदा होती हैं।

इस रोग के कारण

यह रोग जेनेटिक म्यूटेशन के कारण होता है, जो माता-पिता से बच्चों में पहुंचता है। यदि दोनों माता-पिता सिकल सेल जीन से पीड़ित हैं तो बच्चे को यह रोग होने की 25 फीसदी संभावना होती है। ये बीमारी खासकर अफ्रीका, मध्य पूर्व, भारत, कैरेबियन और भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में ज्यादा पाई जाती है।

सिकल सेल रोग का उपचार

सिकल सेल रोग का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन कई उपचारों से इसके लक्षणों को नियंत्रित कर मरीज का जीवन बेहतर बनाया जा सकता है। इसमें अक्सर तेज दर्द होता है जिसे दर्द निवारक दवाओं से कम किया जाता है। शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए खूब पानी पीना भी दर्द में राहत देता है। गंभीर मामलों में अस्पताल में आईवी ड्रिप या इंजेक्शन की जरूरत पड़ सकती है। चूंकि इस रोग में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, इसलिए न्यूमोनिया और फ्लू जैसे टीके लगवाना जरूरी है, और डॉक्टर कभी-कभी एंटीबायोटिक्स भी देते हैं ताकि संक्रमण से बचा जा सके। सबसे जरूरी है कि डॉक्टर की सलाह पर सही इलाज लिया जाए।

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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