गले में आवेदनों की माला पहने जनसुनवाई में पहुंचा किसान, मांगी आत्मदाह की अनुमति

मानसिक रूप से टूट चुके किसान ने अब महामहिम राष्ट्रपति के नाम आवेदन कलेक्टर को सौंपते हुए गुहार लगाई है कि या तो उसे न्याय दिलाया जाए और आरोपियों पर मामला दर्ज हो, अन्यथा उसे आत्मदाह करने की अनुमति प्रदान की जाए।
Neemuch Farmers Protest

Neemuch Farmers Protest

नीमच जिला कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई उस समय भावुक क्षणों में बदल गई, जब ग्राम भोलियावास के एक दलित किसान ने प्रशासन के सामने आत्मदाह की अनुमति मांग ली। पीड़ित किसान मोहनलाल बागरी अपनी व्यथा सुनाने के लिए गले में आवेदनों की माला पहनकर पहुंचा था। उसका आरोप है कि गांव के ही कुछ रसूखदारों ने षड्यंत्र रचकर उसकी लाखों रुपये की कृषि भूमि धोखाधड़ी से अपने नाम करवा ली है।

पीड़ित मोहनलाल ने बताया कि यह पूरा मामला सुनियोजित धोखाधड़ी का है। 18 नवंबर 2024 को गांव के रामगोपाल धाकड़, हंसराज चंद्रवंशी और मनोहरलाल धाकड़ उसके पास आए और ऑनलाइन केवाईसी व भू-अधिकार पुस्तिका बनवाने का झांसा देकर उसके आधार कार्ड और जमीन के दस्तावेज ले लिए। अगले दिन उसे कलेक्टर कार्यालय ले जाया गया, जहाँ अशिक्षित होने का फायदा उठाते हुए उससे कई कागजों पर हस्ताक्षर और अंगूठे लगवा लिए गए।

जमीन हड़पने वाले दबंगों ने दी धमकी 

किसान को बाद में पता चला कि उसकी 0.12 हेक्टेयर भूमि, जिसकी बाजार कीमत लगभग 70 से 80 लाख रुपये है, आरोपियों ने चालाकी से अपने नाम करवा ली है। किसान का आरोप है कि जब उसने आरोपियों से अपनी जमीन के बारे में पूछा, तो उन्होंने उसे यह कहकर डराया कि जमीन अब हमारे नाम है, तुझसे जो हो सके कर लेना।

आत्मदाह करने की मांगी अनुमति 

पीड़ित का कहना है कि वह पूर्व में भी कई बार शिकायत कर चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मानसिक रूप से टूट चुके किसान ने अब महामहिम राष्ट्रपति के नाम आवेदन कलेक्टर को सौंपते हुए गुहार लगाई है कि या तो उसे न्याय दिलाया जाए और आरोपियों पर मामला दर्ज हो, अन्यथा उसे आत्मदाह करने की अनुमति प्रदान की जाए।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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