सी आर पी एफ जवान की मौत के मामले में सी बी आई जांच के आदेश

सी आर पी एफ जवान की मौत के मामले में सी बी आई जांच के आदेश

नीमच। घनश्याम लोहार।

सीआर पी एफ के एक जवान की हुई संदिग्ध मौत के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है जिसमे जवान की मौत के मामले में हाईकोर्ट ने सीबीआई जाँच के आदेश देने के साथ ही छह महीने में अपनी रिपोर्ट को प्रस्तुत करने के आदेश दिए है । बताया जा रहा है की वर्ष 2015 में सीआर पी एफ नीमच में ट्रेनिंग के लिए आये सुमन रॉय की लाश संदिग्ध हालत में पेड़ पर लटकी मिली थी जिसके बाद उसका पीएम करवा कर उसका शव परिवारजनों को सौप दिया था और जवान की इस मौत को अधिकारियो द्वारा आत्महत्या बताया था । लेकिन जवान सुमन की माँ ने अपना संदेह जताते हुवे इस मामले में अपनी शिकायत वरिष्ठ अधिकारियो को की गई ओर जब सुनवाई नहीं हुई तो वे न्यायालय की शरण में पहुँची जहा अब इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के जस्टिस संजीव बेनर्जी ओर जस्टिस कौशिक चंद्रा ने जवान सुमन की माँ ज्योत्सना रॉय की याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीआई जाँच के आदेश दिए है ।

बता दे कि सीआरपीएफ जवान सुमन रॉय की मौत का ये मामला 24 फरवरी 2015 का है। जब उसकी लाश सीआर पी एफ केम्पस में ही एक पेड़ पर लटकी मिली थी जिसे आत्महत्या बताया गया था। लेकिन इस मामले में सुमन की माँ ज्योत्सना रॉय ने सीनियर अधिकारियो पर मानसिक ओर शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। और उसकी की वजह से सुमन की मौत होने का आरोप भी अधिकारियो पर लगाया था। और न्यायलय से इस मामले में उच्च स्तरीय जाँच की मांग की थी जिसमे अब सीबीआई के जाँच के आदेश हुवे है

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews