मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे देशव्यापी अभियान के तहत केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) ने गांजे के अवैध नेटवर्क पर कड़ा प्रहार किया है। मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र सहित अन्य इलाकों से 236 किलोग्राम गांजे की खेप भी जब्त की गई है। कई FIR भी दर्ज किए गए हैं।
निखिल गांधी, डिप्टी नारकोटिक्स कमिश्नर, नीमच ने फसलों के बीच गांजे की अवैध खेती और तस्करी के अलग-अलग तरीकों की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने इससे होने वाले नुकसान के बारे में भी बताया। नारकोटिक्स विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि अवैध खेती या तस्करी के जरिए मुनाफा कमाने वालों पर आगे भी इसी तरह सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
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सब्जियों के बीच हो रही गांजे की खेती
नीमच डिप्टी नारकोटिक्स कमिश्नर ने बताया कि तस्कर अब सीधी खेती करने के बजाय सब्जियों के बीच, मक्का जैसी ऊंची फसलों की आड़ में या फिर घरों के बैकयार्ड और बंजर वन भूमि पर छिपकर गांजा उगाने की कोशिश करते हैं। हालांकि, विभाग के मजबूत इंटेलिजेंस नेटवर्क और सघन सर्चिंग के चलते ऐसे सिंडिकेट्स लगातार बेनकाब हो रहे हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में सीबीएन द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी भी दी। जंगलों में फैली करीब 2,090 हेक्टेयर अवैध गांजे की खेती को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है।
युवाओं के दिमाग पर गंभीर और स्थायी नुकसान
डिप्टी कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि गांजे के सेवन को कई लोग हल्के में लेते हैं, जबकि यह मस्तिष्क के लिए बेहद घातक है। यह दिमाग के मुख्य हिस्सों—प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स, हिप्पोकैम्पस और सेरिबेलम पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इससे सोचने-समझने, निर्णय लेने और याददाश्त की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित होती है। विशेषकर युवाओं में, जिनका मस्तिष्क विकास की अवस्था में होता है, यह स्थायी नुकसान पहुंचाता है।
NDPS एक्ट के तहत 20 साल की कैद से लेकर फांसी तक का प्रावधान
निखिल गांधी ने बताया कि गांजे की खेती और तस्करी को लेकर कानून बेहद सख्त है। NDPS एक्ट के तहत कमर्शियल क्वांटिटी (व्यावसायिक मात्रा) में गांजे के कारोबार पर 20 साल तक के कठोर कारावास का प्रावधान है। बार-बार अपराध करने वाले (रिपीट ऑफेंडर्स) के मामलों में मृत्युदंड (कैपिटल पनिशमेंट) तक का प्रावधान कानून में मौजूद है। हालांकि जो लोग केवल नशे की लत के शिकार (एडिक्ट) हैं और स्वेच्छा से सुधार चाहते हैं, उनके लिए एक्ट में रिहैबिलिटेशन (पुनर्वास) की व्यवस्था भी है।
कमलेश सारडा की रिपोर्ट
