आउटसोर्स और अस्थायी कर्मियों के हक में सड़कों पर उतरी सीटू, सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन, उग्र आंदोलन की चेतावनी

सीटू ने याद दिलाया कि संकल्प पत्र के बिंदु क्रमांक 81 में इन श्रेणियों के कर्मचारियों को समान वेतन और स्थायी करने का वादा किया गया था। लेकिन अब सरकार अपने ही वादों से पीछे हटती नजर आ रही है, जो कर्मचारियों के साथ धोखा और अमानवीय व्यवहार है।
Neemuch memorandum

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आउटसोर्स, संविदा, ठेका और अन्य अस्थायी श्रेणी के कर्मचारियों को स्थायी करने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने की मांग को लेकर सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) की जिला शाखा नीमच ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। सीटू के बैनर तले बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री के नाम प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

ज्ञापन सौंपने से पूर्व कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्रित हुए कर्मचारियों ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि सरकार अपने वादों से मुकर रही है। सीटू पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

मार्च 2027 की समय सीमा से कर्मचारियों में हड़कंप

सीटू पदाधिकारियों ने बताया कि हाल ही में विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से यह जानकारी सामने आई है कि सरकार मार्च 2027 तक आउटसोर्स, संविदा और ठेका प्रथा को समाप्त करने की योजना बना रही है। इस निर्णय ने उन हजारों कर्मचारियों को संकट में डाल दिया है जो पिछले 15 से 20 वर्षों से विभागों में नियमित कर्मचारियों की भांति सेवाएं दे रहे हैं। संगठन का कहना है कि इतने लंबे समय तक सेवा देने के बाद भी कर्मचारियों को स्थायित्व और उचित वेतन से वंचित रखना अन्यायपूर्ण है।

चुनावी वादे और ‘विश्वासघात’ का आरोप

ज्ञापन में भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र का भी प्रमुखता से जिक्र किया गया है। सीटू ने याद दिलाया कि संकल्प पत्र के बिंदु क्रमांक 81 में इन श्रेणियों के कर्मचारियों को समान वेतन और स्थायी करने का वादा किया गया था। लेकिन अब सरकार अपने ही वादों से पीछे हटती नजर आ रही है, जो कर्मचारियों के साथ धोखा और अमानवीय व्यवहार है।

सीटू की 6 प्रमुख मांगें

  • स्थायीकरण: आउटसोर्स, संविदा, ठेका, दैनिक वेतनभोगी, अंशकालीन, ग्राम पंचायत नल चालक और चौकीदार सहित सभी अस्थायी कर्मचारियों को तुरंत प्रभाव से स्थायी किया जाए।
  • समान वेतन: स्थायी होने तक ‘समान काम-समान वेतन’ का सिद्धांत लागू हो और अन्य शासकीय सुविधाएं प्रदान की जाएं।
  • बोनस अंक: सरकारी भर्तियों में अनुभव के आधार पर संविदा व आउटसोर्स कर्मचारियों को बोनस अंक दिए जाएं।
  • न्यूनतम वेतन: बढ़ती महंगाई को देखते हुए न्यूनतम वेतन 30,000 रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया जाए।
  • श्रम संहिता व नीति: मध्य प्रदेश में चार नई श्रम संहिताओं को लागू न किया जाए और ‘निश्चित अवधि रोजगार नीति’ (Fixed Term Employment) को पूर्णतः समाप्त किया जाए।
  • लंबित भुगतान: नीमच नगर पालिका के संविदा कर्मचारियों के रुके हुए वेतन का तत्काल भुगतान कराया जाए।

कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट 

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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