
Neemuch district administration action against mining mafia
मध्य प्रदेश में शासकीय संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और अवैध खनन करने वाले माफियाओं के खिलाफ प्रशासन ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। इसी कड़ी में नीमच जिले में अवैध उत्खनन के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई की गई है। नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए एक अवैध उत्खननकर्ता (ठेकेदार) पर19 लाख 18 हजार 500 रुपये का भारी-भरकम जुर्माना ठोका है। इस बड़ी कार्रवाई से प्रदेश भर के खनन माफियाओं में हड़कंप मच गया है।
पूरा मामला नीमच जिले के ग्राम मोरवन डेम के पास का है। खनिज विभाग के प्रतिवेदन और मौके के पंचनामे में यह बड़ा खुलासा हुआ कि शासकीय भूमि (सर्वे नंबर 977/2, 974/2 व 977/1/1) से अवैध रूप से बड़े पैमाने पर पत्थरों का उत्खनन किया जा रहा था। इन चोरी के पत्थरों को पास ही ग्राम मोरवन (सर्वे नंबर 977/4) में एक निर्माण एजेंसी द्वारा पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर बनाई जा रही बाउंड्री वॉल में धड़ल्ले से खपाया जा रहा था।
1279 घनमीटर अवैध पत्थर का हुआ था इस्तेमाल
खनिज विभाग ने जब मौके पर पहुंचकर जांच की, तो बाउंड्री वॉल के निर्माण में कुल 2065 घनमीटर खनिज का उपयोग पाया गया। इसमें से 786 घनमीटर रेत और सीमेंट (मोर्टार) को हटाकर यह साफ हुआ कि पूरे 1279 घनमीटर पत्थर का उपयोग बिना रॉयल्टी चुकाए, पूरी तरह से अवैध रूप से किया गया था।
रॉयल्टी का 15 गुना जुर्माना और पर्यावरण क्षतिपूर्ति भी
इस बड़ी चोरी पर ‘मध्यप्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन तथा भण्डारण का निवारण) नियम 2022’ के तहत रिकॉर्ड पेनाल्टी लगाई गई है। आरोपी पर खनिज रॉयल्टी का 15 गुना अर्थदंड (9 लाख 59 हजार 250 रुपये) और इतनी ही राशि (9 लाख 59 हजार 250 रुपये) पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की एवज में पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में लगाई गई है। दोनों को मिलाकर कुल शास्ति राशि 19 लाख 18 हजार 500 रुपये तय की गई है।
15 दिन का अल्टीमेटम, नहीं तो होगी कुर्की
प्रशासन ने जुर्माने की वसूली के लिए भी कड़े निर्देश जारी किए हैं। उत्खननकर्ता को 15 दिन के भीतर चालान के जरिये यह पूरी राशि शासकीय कोष में जमा करनी होगी। यदि वह तय समय में यह राशि जमा नहीं करता है, तो उसके खिलाफ मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता के सख्त प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी और ‘भू-राजस्व के बकाया’ की तरह उसकी संपत्ति से इस 19 लाख से अधिक की राशि को वसूला जाएगा।
कलेक्टर की सख्त चेतावनी
नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने इस बड़ी कार्रवाई के बाद स्पष्ट कर दिया है कि शासकीय भूमि से अवैध उत्खनन एक बेहद गंभीर अपराध है। जिले में इसके खिलाफ एक सतत और सघन अभियान चलाया जा रहा है। शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति या एजेंसी पर आगे भी इसी तरह की सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कैलकुलेशन पक्का, पर नाम कच्चा, क्या खूब पर्दादारी है
इस पूरी कार्रवाई में कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं, यहाँ प्रशासन की काबिलियत देखिए,उन्होंने चुराए गए पत्थर की एक-एक इंच नाप ली (2065 घनमीटर में से 786 घनमीटर रेत-सीमेंट घटाकर 1279 घनमीटर पत्थर निकाल लिया), जुर्माने की पाई-पाई (19,18,500/- रुपये) का सटीक गणित लगा लिया, लेकिन इतने पक्के हिसाब के बीच चोर का ‘नाम’ लिखना भूल गए, आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी या ‘ऊपर का दबाव’ है कि नाम उजागर करने में कलम की स्याही सूख गई? प्रशासन की यह “अनाम कार्रवाई” देखकर तो यही लगता है कि कार्रवाई का डंडा भी चल गया, वाहवाही भी हो गई और ‘माफियाओं’ की साख पर कोई आंच भी नहीं आई। इसे कहते हैं- सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे, अब जनता भी सोच रही है कि सरकारी संपत्ति लूटने वाले इन ‘गुमनाम रसूखदारों’ के नाम पर आखिर कब तक यह प्रशासनिक पर्दा डला रहेगा?
पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

