पूरे भारतवर्ष में जहां विजयदशमी (दशहरे) के दिन रावण दहन के साथ ही शारदीय नवरात्र और दशहरा उत्सव का समापन हो जाता है, वहीं मध्य प्रदेश के नीमच जिले में वर्षों से एक बेहद अनोखी और ऐतिहासिक परंपरा निभाई जा रही है। यहां दशहरे के ठीक पांच दिन बाद शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में बुराई के प्रतीक रावण के अहंकार का अंत किया जाता है। इसी अनूठी परंपरा के तहत रविवार की रात नीमच सिटी के शिवनगर स्थित ऐतिहासिक ‘रावण रुंडी’ मैदान में भव्य रावण दहन का आयोजन किया गया, जिसका साक्षी बनने के लिए हजारों की संख्या में जनसैलाब उमड़ पड़ा।
दो घंटे तक सतरंगी आतिशबाजी से जगमगाया आसमान
रविवार की शाम से ही शिवनगर के रावण रुंडी मैदान में उत्सव जैसा माहौल बन गया था। पुतला दहन से पहले करीब दो घंटे तक चली भव्य और सतरंगी आतिशबाजी के मुकाबले ने पूरे आसमान को रोशनी से सराबोर कर दिया। रंग-बिरंगी रोशनी और पटाखों की गूंज के बीच दर्शक मंत्रमुग्ध नजर आए। मैदान के चारों ओर विशाल मेले जैसा माहौल रहा, जहां नीमच सिटी सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों से आए हजारों लोगों ने इस ऐतिहासिक क्षण का आनंद लिया।
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80 स्वांगधारियों और देवी-देवताओं के स्वरूपों ने खींचा ध्यान
इस पारंपरिक आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण भव्य चल समारोह और स्वांगधारियों की प्रस्तुति रही। पुतला दहन से पूर्व करीब 80 स्वांगधारियों ने भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता, भक्त शिरोमणि हनुमान, राधा-कृष्ण और वीरांगना झांसी की रानी के जीवंत स्वरूप धारण कर पूरे मैदान की पारंपरिक परिक्रमा की।
इसके पश्चात माहौल उस वक्त और भी भक्तिमय और रोमांचक हो गया, जब लाल भेरू, नील भेरू, काल भैरव और कालकी माता के रौद्र व दिव्य स्वरूपों का मैदान में आगमन हुआ। ढोल-ढमाकों और जयकारों के बीच इन स्वरूपों ने अपनी पारंपरिक प्रस्तुति दी।
धू-धू कर जले रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले
परिक्रमा और आतिशबाजी के पश्चात भगवान श्रीराम के स्वरूप द्वारा अग्निबाण चलाते ही रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के विशालकाय पुतले धू-धू कर जल उठे। पुतलों के दहन के साथ ही पूरा रावण रुंडी मैदान ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा। आयोजकों के मुताबिक, नीमच सिटी में शरद पूर्णिमा पर रावण दहन की यह परंपरा दशकों पुरानी है, जिसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाया जा रहा है।
पिपली चौक पर राम-भरत मिलाप के साथ होगा समापन
नीमच सिटी के इस तीन दिवसीय अनूठे दशहरा उत्सव का विधिवत समापन सोमवार शाम को होगा। परंपरा के अनुसार, नीमच सिटी के मुख्य पिपली चौक पर सोमवार शाम को भगवान श्रीराम और भाई भरत के भावुक ‘राम-भरत मिलाप’ का मंचन किया जाएगा, जिसके साथ ही इस ऐतिहासिक उत्सव को अगले वर्ष तक के लिए विराम दिया जाएगा।
कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट
