अफीम नीति 2026-27 जारी: दिवाली से पहले केंद्र सरकार का तोहफा, इस वर्ष बढ़ेंगे साढ़े 10 हजार नए किसान, अगले साल के लिए भी कड़े नियम तय

सरकार ने आगामी फसल वर्ष 2027-28 के लिए भी अभी से चेतावनी जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अगले साल लाइसेंस पाने के लिए इस बार किसानों को प्रति हेक्टेयर कम से कम 5.9 किलोग्राम मॉर्फिन की उपज देनी होगी।
Opium Policy 2026-27 Released

Opium Policy 2026-27 Released

केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय ने फसल वर्ष 2026-27 (1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2027) के लिए बहुप्रतीक्षित अफीम लाइसेंस की नई नीति आधिकारिक रूप से जारी कर दी है। राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, इस बार अफीम चीरा लगाने वाले लाइसेंस के लिए वे किसान पात्र होंगे जिन्होंने पिछले साल यानी 2025-26 में खेती की थी और प्रति हेक्टेयर कम से कम 4.4 किलोग्राम मॉर्फिन की औसत उपज दी थी।

अफीम नीति के अनुसार जिन किसानों ने पिछले तीन सालों यानी 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की देखरेख में अपनी पूरी फसल जोत या हांक दी थी, लेकिन साल 2022-23 में नहीं हांकी थी, वे भी इसके पात्र माने जाएंगे। इसके साथ ही जिन किसानों के लाइसेंस खारिज होने के मामले में अपील मंजूर हो गई है या जो मृतक किसानों के कानूनी वारिस हैं, उन्हें भी लाइसेंस का लाभ मिल सकेगा।

खेती के रकबे को लेकर नीति में स्पष्ट किया गया है कि सभी पात्र किसानों को एक ही प्लॉट में 0.10 हेक्टेयर यानि 10 आरी या करीब एक बीघा का लाइसेंस दिया जाएगा, जो एक से ज्यादा खसरा नंबरों में भी हो सकता है। रकबा पूरा करने के लिए किसान दूसरों की जमीन पट्टे पर भी ले सकते हैं और यदि नपाई के दौरान खेती का रकबा तय सीमा से पांच प्रतिशत तक ज्यादा निकलता है, तो उसे माफ किया जाएगा।

ऑनलाइन माध्यम से करना होगा आवेदन 

किसानों को इसके लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन करना होगा, जिसके लिए केंद्रीय स्वापक ब्यूरो की आधिकारिक वेबसाइट cbn.gov.in या cbnonline.gov.in पर सूची जारी की जाएगी। पुराने किसानों को वे दस्तावेज दोबारा जमा नहीं करने होंगे जो पहले से ही विभाग के पास सुरक्षित हैं।

2027-28 के लिए अभी से चेतावनी जारी 

सरकार ने आगामी फसल वर्ष 2027-28 के लिए भी अभी से चेतावनी जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अगले साल लाइसेंस पाने के लिए इस बार किसानों को प्रति हेक्टेयर कम से कम 5.9 किलोग्राम मॉर्फिन की उपज देनी होगी। जो किसान लगातार तीन साल यानी 2024-25, 2025-26 और 2026-27 तक अपनी पूरी फसल हांकते रहे हैं, उन्हें 2027-28 में चीरा लगाने का लाइसेंस नहीं दिया जाएगा, बल्कि वे बिना चीर वाली सीपीएस यानी पोस्ता भूसा पद्धति की खेती के पात्र होंगे। अफीम का भुगतान नीमच या गाजीपुर कारखाने में जांच के बाद सांद्रता और मॉर्फिन की मात्रा के आधार पर किया जाएगा। सीबीएन द्वारा जल्द ही गांववार कार्यक्रम और लाइसेंस वितरण की तारीखें घोषित की जाएंगी।

अफीम नीति के महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस वर्ष बढ़ेंगे साढ़े 10 हजार नए किसान, 10 और 5 आरी का दिया जाएगा अफीम लाइसेंस
  • मार्फिन की मात्रता 4.4 देने वाले किसानों को मिलेंगे चीराई का लाइसेंस
  • 4.4 से कम मार्फिन देने वाले किसानों को मिलेगा 5 आरी का सीपीएस का लाइसेंस
  • सीपीएस सिस्टम के तहत जिन किसानो ने 800 किलोग्राम प्रति हेक्टयर डोडा दिया है, उन्हें आरी का सीपीएस लाइसेंस दिया जाएगा।
  • वर्ष 1998-99 से लेकर वर्ष 2003-04 तक तक जिन किसानों ने अफीम दी उन्हें निर्धारित औसत में दो किलो की छूट देकर लाइसेंस दिया जाएगा। ये किसान अगले पांच साल के लिए अफीम के लाइसेंस के लिए पात्र होंगे।
  • अफीम का लाइसेंस चीराई वाले किसानों को 10 आरी और सीपीएस सिस्टम वालों को 5 आरी का दिया जाएगा।

https://www.mpbreakingnews.in/wp-content/uploads/2026/10/mpbn-20261024-c23a40.pdf

https://www.mpbreakingnews.in/wp-content/uploads/2026/10/mpbn-20261024-212e3c.pdf

कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट 

Kamlesh Sarda
लेखक के बारे में
I'm reporter last 30 years I'm working with danik bhaskar, bansal news, patrika, the sootra, mp breaking news also View all posts by Kamlesh Sarda →
Follow Us :GoogleNews