मुख्यमंत्री के सन्देश के बाद भी खातें में नहीं आई राशि, लॉकडाउन में मजूदर परेशान

मुख्यमंत्री के सन्देश के बाद भी खातें में नहीं आई राशि, लॉकडाउन में मजूदर परेशान

नीमच। श्याम जाटव| जिले में लॉक डाउन चल रहा है ऐसे में मजदूर वर्ग के लिए रोजी रोटी का संकट गहरा रहा है। दूसरी तरफ निर्माण असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले पंजीक्रत श्रमिक ज्यादा परेशान है। 2 अप्रैल को कर्मकार मंडल में पंजीक्रत श्रमिक के मोबाइल पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का मेसेज आया कि आपको लॉक डाउन में घबराने की जरूरत नहीं है और आपके खातें में 1 हजार रूप्ए की राशि जमा करा दी। दो दिन बाद मजदूरों ने एटीएम बूथ पहंुचकर राशि निकालने गए। लेकिन खाते में किसी प्रकार की राशि जमा नहीं हुई। ऐसी स्थिति में मजदूरों में नाराजगी है। मुख्मंत्री के सन्देश को आए 10 दिन से ज्यादा हो गए है लेकिन अभी तक रूप्ए खाते में जमा नहीं हुए। नीमच जिले में कुल 31 हजार 918 पंजिकृत श्रमिक हैं
-1 हजार अहम है मजदूर के लिए
वर्तमान में तीन सप्ताह से ज्यादा समय से देश में लॉक डाउन चल रहा है ऐसे में मजदूर के लिए 1 हजार की राशि हाथ खर्च के लिए जरूरी है। लेकिन सरकार की योजना के लाभ के साथ-साथ 1 हजार रूप्ए की राशि के लिए तरस गए। कई बार बैंक के चक्कर लगा चुके श्रमिक परेशां है। वे पंचायत स्तर पर चक्कर लगा रहे है लेकिन राशि श्रमिक के सीधे खाते में राषि जमा होती है। इसलिए पंचायत के कर्मचारी भी कुछ बताने की स्थिति में नहीं है।
-क्या कहते मजूदर
निर्माण श्रमिक पप्पूलाल जाटव, बालाराम जाटव ने बताया 2 अप्रैल को मोबाइल पर मुख्यमंत्री का एसएमएस आया कि आपके खातें में 1 हजार रूप्ए जमा करा दिए। एटीएम से पैसा निकालने के लिए गए थे तब पता चला खाते में पैसा जमा नहीं हुआ ।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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