कड़कड़ाती ठंड में न्याय की गुहार: मासूम बच्ची को गोद में लेकर किसान परिवार कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरने पर

लगातार अनदेखी के बाद परिवार ने अंतिम विकल्प के रूप में धरने का रास्ता चुना है। भीषण ठंड में एक मासूम बच्ची और बुजुर्ग महिला का खुले में बैठना प्रशासन की कार्यप्रणाली और मानवीय संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है।
Neemuch farmer families protest

Neemuch farmer families protest

रात की कड़कड़ाती ठंड के बीच नीमच कलेक्टर कार्यालय परिसर में एक किसान परिवार द्वारा किया जा रहा धरना प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। राजस्थान के छोटीसादड़ी निवासी किसान लक्ष्मीनारायण पाटीदार अपने पूरे परिवार के साथ न्याय की मांग को लेकर खुले आसमान के नीचे बैठे हैं। धरने में उनकी 55 वर्षीय पत्नी और मात्र 10 महीने की मासूम बच्ची भी शामिल है।

पीड़ित किसान का आरोप है कि मध्यप्रदेश के नीमच जिले के जोगिया सिम्बदा (सेमवाडा) गांव स्थित उनकी कृषि भूमि और रास्ते पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है। इस संबंध में वे राजस्व अधिकारियों को कई बार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जबकि जिले में हाल ही में गांव-गांव राजस्व शिविर भी आयोजित किए गए, फिर भी उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है।

जमीन वापस नहीं मिलने तक धरना देने की चेतावनी 

धरने पर बैठे लक्ष्मीनारायण पाटीदार ने दो टूक शब्दों में कहा,“जब तक हमारी सुनवाई नहीं होगी और हमें हमारी जमीन व रास्ता वापस नहीं मिलेगा, तब तक हम यहीं बैठे रहेंगे। चाहे कितनी भी ठंड क्यों न हो। अगर मेरे परिवार को यहां कुछ होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।”

प्रशासन ने दिया समस्या समाधान का आश्वासन 

लगातार अनदेखी के बाद परिवार ने अंतिम विकल्प के रूप में धरने का रास्ता चुना है। भीषण ठंड में एक मासूम बच्ची और बुजुर्ग महिला का खुले में बैठना प्रशासन की कार्यप्रणाली और मानवीय संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है।
फिलहाल इस मामले में रात 9:30 बजे प्रशासन की ओर से तहसीलदार मौके पर पहुंचे हैं और मामले में समस्या का जल्द समाधान करने का आश्वासन दिया है मगर परिवार अब भी धरने पर बैठा हुआ है अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब संज्ञान लेकर पीड़ित किसान परिवार को न्याय दिलाता है, या फिर यह धरना और लंबा खिंचता है।

कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट  

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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