नीमच जिले की सिंगोली तहसील के गांवों में लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती और ट्रिपिंग से परेशान किसानों व ग्रामीणों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया और उन्होंने क्षेत्र के ग्राम कछला स्थित विद्युत सब-स्टेशन का घेराव किया। आक्रोशित किसानों ने बिजली विभाग की लचर कार्यप्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सब स्टेशन (स्थानीय लोग इसे ग्रिड भी कहते है) के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रदर्शनकारी मुख्य मार्ग पर पहुंचे और नीमच-सिंगोली मार्ग पर दरी बिछाकर चक्काजाम कर दिया।
फसलों की सिंचाई पर संकट, किसानों में भारी रोष
प्रदर्शन में शामिल किसानों का कहना है कि वर्तमान में फसलों की सिंचाई का महत्वपूर्ण दौर चल रहा है। ऐसे समय में पर्याप्त और निर्बाध बिजली मिलना बेहद आवश्यक है, लेकिन विभाग द्वारा घंटों बिजली कटौती की जा रही है और बार-बार ट्रिपिंग की समस्या आ रही है। किसानों ने आरोप लगाया कि कई बार मौखिक और लिखित रूप से शिकायत करने के बावजूद अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है, जिससे उनकी मेहनत और फसलें दोनों बर्बाद होने की कगार पर हैं।
“किसान एकता जिंदाबाद” और “बिजली कटौती बंद करो” के लगे नारे
ग्रामीणों ने ग्रिड का मुख्य चैनल गेट बंद कर ताला लगाने का प्रयास भी किया। बड़ी संख्या में किसान नीमच-सिंगोली मुख्य मार्ग पर पहुंचे और सड़क पर बैठकर धरना शुरू कर दिया। किसानों ने प्रशासन व बिजली कंपनी के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए “किसान एकता जिंदाबाद”, “किसानों की मांगें पूरी करो” और “बिजली कटौती बंद करो, पूरी बिजली दो” के नारे लगाए।
सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतार, एंबुलेंस को दिया रास्ता
चक्काजाम के चलते नीमच-सिंगोली मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया और सड़क के दोनों ओर यात्री बसों, ट्रकों तथा दोपहिया वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। हालांकि, विरोध प्रदर्शन के दौरान किसानों ने संवेदनशीलता का परिचय दिया। जाम में फंसी आपातकालीन 108 एंबुलेंस को प्रदर्शनकारियों ने बीच सड़क से हटकर तुरंत सुरक्षित रास्ता देकर रवाना किया।
अधिकारियों ने समस्या के शिग्र निराकरण का दिया भरोसा
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस अधिकारियों ने सड़क पर बैठे किसानों को समझा-बुझाकर शांत कराने का प्रयास किया और बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत कर समस्या के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही क्षेत्र में नियमित और पर्याप्त वोल्टेज के साथ बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट






