सरकारी जमीन से कब्ज़ा हटाने की 11 बार गुहार लगा चुके ग्रामीण ने कलेक्टर कार्यालय पर आत्मदाह का प्रयास, लगाये भ्रष्टाचार के आरोप

ग्रामीण चांदमल चारण ने कहा कि वो शासकीय जमीन से कब्ज़ा हटाने के लिए 11 बार आवेदन दे चुका है कोई नहीं सुन रहा, उसने पटवारी, तहसीलदार और एसडीएम पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।
Villager attempts self-immolation Neemuch Collector office

Villager attempts self-immolation Neemuch Collector office

स्कूल और पंचायत की जमीन पर कब्जे की 11 बार शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई न होने से हताश होकर ग्रामीण चांदमल चारण ने नीमच कलेक्टर कार्यालय पर मिट्टी का तेल (घासलेट) डालकर आत्मदाह का प्रयास किया। ग्रामीण ने पटवारी, तहसीलदार और एसडीएम पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित ग्रामीण ने कब्ज़ा करने वाले दबंगों पर मारपीट के भी आरोप लगाये हैं।

ग्रामीण चांदमल चारण का आरोप है कि आलोरी करवाड़ा ग्राम पंचायत में 1950 से बने शासकीय स्कूल की बाउंड्री और बच्चों की जगह पर कुछ दबंगों (किशनलाल, कैलाश चंद्र, नटवर आदि) ने अवैध कब्जा कर लिया है। इसके अलावा, ग्राम बदावा और कश्मारिया में 80×160 फीट की सरकारी जमीन पर भी अतिक्रमण कर 4 दुकानें और 2 मकान बना लिए गए हैं, जिन्हें अब अतिक्रमणकारी बेचने की कोशिश कर रहे हैं।

धारदार हथियार से जानलेवा हमला

ग्रामीण ने बताया कि अतिक्रमण का विरोध करने पर पिछले दिनों दबंगों के परिवार ने उस पर धारदार हथियार से हमला किया। इस हमले में उसकी आंख पर 15 टांके आए और उसे 15 दिनों तक रतनगढ़ व नीमच के शासकीय अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा।

खुलेआम रिश्वतखोरी के आरोप

चांदमल ने आरोप लगाया कि अतिक्रमणकारियों का कहना है कि उन्होंने “ऊपर तक पैसे पहुंचा दिए हैं” इसलिए प्रशासन उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उधर आत्मदाह के प्रयास और भारी हंगामे के बाद अधिकारियों ने अब तहसीलदार को मामले की जांच के लिए भेजने की बात कही है। हालांकि पीड़ित ने मांग की है कि तहसीलदार स्वयं मौके पर जाकर जमीन का सीमांकन (Demarcation) करें, क्योंकि पटवारी रिश्वतखोर है और वह मौके पर जाने को तैयार नहीं है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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