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ग्राम पंचायत से 18 साल का रिकॉर्ड गायब! उपसरपंच ने कलेक्टर की जनसुनवाई में की शिकायत

Written by:Atul Saxena
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ग्राम पंचायत से 18 साल का रिकॉर्ड गायब! उपसरपंच ने कलेक्टर की जनसुनवाई में की शिकायत

नीमच जिले की जनपद पंचायत जावद की ग्राम पंचायत मोड़ी के उपसरपंच ने अपनी पंचायत के खिलाफ वर्ष 1995 से लेकर 2012 तक सभी सार्वजनिक रिकॉर्ड के गायब होने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में उन्होंने जिला मुख्यालय पर कलेक्टर की जन सुनवाई में एक विस्तृत शिकायत प्रस्तुत की है, जिसमें उन्होंने  भू–अधिलेख, पट्टा बुक, प्रस्ताव रजिस्टर, उपस्थिति पंजी,ले आउट नक्शा,पंचायत स्वामित्व दुकान, आवंटन प्रोसेसिंग दस्तावेज, प्रस्ताव सहित आवश्यक शासकीय रिकॉर्ड गायब होने की जानकारी दी है। शिकायत में उप सरपंच ने संबंधित सचिव ,सरपंच पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

ग्राम पंचायत मोड़ी के उपसरपंच कारूलाल राठौड़ ने अपने स्शिकयती पत्र में उल्लेख किया है कि वे 2020 से इस मामले की शिकायत कर रह हैं। जिस पर अभी तक कोई कार्रवाई होते दिखाई नहीं दे रही । उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत मोड़ी  में वर्ष 1995 से लेकर 2012 तक की अवधि के संपूर्ण अभिलेख/सार्वजनिक अभिलेख/अभिलेख गायब हैं जिसकी शिकायत सीएम हेल्प लाइन पर की ही, उन्होंने कहा सरकारी दस्तावेज गायब होना, या छेड़छाड़ करना कानूनी अपराध है जिसमें जिले के अधिकारी भी मिले हुए है।

18 साल का रिकॉर्ड गायब प्रशासन मौन  

उप सरपंच ने कहा प्रतिवर्ष ऑडिट रिपोर्ट की लेखा परीक्षण होती है। जिसमें अधिकारियों द्वारा दस्तावेज की जांच होती है। 18 साल पुराना रिकॉर्ड गायब होने पर भी अधिकारियों ने कोई एक्शन नहीं लिया। वही राजस्व अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। जो आज तक नहीं हुआ।

सीएम हेल्पलाइन पर भी की जा चुकी शिकायत 

शिकायतकर्ता ने दावा किया कि इन अभिलेखों के गायब होने की शिकायत उन्होंने पूर्व सीएम हेल्पलाइन पर भी दर्ज की थी (शिकायत रैंक 33519422), लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उपसरपंच ने शिकायती पत्र में  बताया कि रिकॉर्ड गायब होने के कारण कई प्रकार के कानूनी और अवैध बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।

2020 में जानकारी मांगी, जवाब मिला रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं 

उप सरपंच राठौड़ ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन से वर्ष 2020 से गायब होने की जानकारी दर्ज की गई है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।  सभी दस्तावेजों के गायब होने के कारण, वर्ष 2020 में एक आम सहमति के भूखण्ड के आवेदन पर भी भूमि रिकॉर्ड कार्यालय से प्रमाणित जानकारी के अधिकार अधिनियम के तहत मांगे जाने पर उन्हें यही जवाब मिला कि रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं।

दोषियों पर एफआईआर करने की मांग 

उपसरपंच कारूलाल राठौड़ ने जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि इस मामले के गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई दर्ज की जाए और अभिलेखों को बरामद करने का प्रयास किया जाए।
सम्बन्धित व्यक्तियों पर फिर दर्ज की जाए। अब देखना ये कि या जिला कलेक्ट इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं ।

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Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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