विकास की अंधी दौड़ में इंसान इतना संवेदनहीन हो गया है कि वह बेजुबान प्रकृति की हत्या करने से भी नहीं हिचक रहा है। नीमच शहर से एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। सुनकर शायद कुछ लोग कहें कि “छोड़ो बकवास है, एक मामूली पेड़ ही तो है” लेकिन जिस बेरहमी और सोची-समझी साजिश के साथ इस पेड़ को तिल-तिल कर मारा गया है, वह किसी जघन्य हत्याकांड से कम नहीं है।
यह पूरी घटना नीमच शहर के हृदय स्थल में स्थित गांधी भवन (कांग्रेस कार्यालय) के ठीक सामने की है। आसपास के सभी पेड़ जहाँ हरे-भरे और लहलहा रहे हैं, वहीं उनके बीच मौजूद एक पेड़ अचानक पूरी तरह से सूखकर मुरझा गया है। प्रथम दृष्टया यह कोई प्राकृतिक घटना लग सकती है, लेकिन इसके पीछे की सच्चाई रोंगटे खड़े कर देने वाली है।
साजिश: सलाखें चुभाईं और डाला जहरीला केमिकल
जब इस पेड़ के अचानक सूखने की बारीकी से पड़ताल की गई, तो जो सच सामने आया वह बेहद खौफनाक था। इस बेजुबान पेड़ को बाकायदा एक साजिश के तहत मारा गया है सबसे पहले पेड़ के निचले हिस्से (कंद भाग) में बेरहमी से लोहे की मोटी सलाखें चुभाई गईं और गहरे छेद किए गए। उसके बाद इन छेदों के अंदर घातक एसिड और जहरीला केमिकल भर दिया गया। केमिकल ने पेड़ की जड़ों और तने को अंदर तक खोखला कर दिया, जिससे वह तिल-तिल तड़पकर सूख गया।
मकसद: निर्माण कार्य और अतिक्रमण की राह आसान करना
अब सवाल यह उठता है कि आखिर इस पेड़ का कसूर क्या था? जानकारी के अनुसार, इस पेड़ से कुछ ही दूरी पर एक नए भवन का निर्माण कार्य चल रहा है। आशंका जताई जा रही है कि यह पेड़ उस निर्माण कार्य या संभावित अतिक्रमण की राह में रोड़ा बन रहा था। चूंकि हरे पेड़ को सीधे काटने पर वन विभाग और प्रशासन की कार्रवाई का डर रहता है, इसलिए भू-माफियाओं या निर्माणकर्ताओं ने यह शातिर तरीका अपनाया। साजिश यह थी कि केमिकल से पेड़ सूख जाएगा और बाद में उसे “सूखा हुआ और खतरनाक” बताकर आसानी से हटा दिया जाएगा, ताकि विकास कार्य में कोई बाधा न रहे।
नगर पालिका प्रशासन से जनता के तीखे सवाल
इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण प्रेमियों के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं लोग पूछ रहे हैं कि इस पेड़ की हत्या किसने की या किसके इशारे पर करवाई गई? इस पेड़ के हटने से सीधा फायदा किस निर्माणकर्ता को होने वाला है? पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और वृक्षों के परिरक्षण कानूनों के तहत यह एक संज्ञेय अपराध है। क्या इस ‘हत्या’ के दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज होगी?
पर्यावरण प्रेमियों में नाराजगी, सीएम से करेंगे शिकायत
एक हरे भरे पेड़ की इस तरह हत्या से लोग स्थानीय प्रशासन से सवाल कर रहे हैं वहीं पर्यावरण प्रेमी और पर्यावरणविद भारी आक्रोशित हैं, शहर के प्रतिष्ठित पर्यावरणविद राजेश क्षेत्री का कहना है कि वे इसकी शिकायत नगर पालिका सीएमओ और अध्यक्ष के साथ साथ मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से भीकरेंगे उन्होंने कहा कि किसी भी हरे पेड़ की इस तरह हत्या बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गंभीर बात ये है कि यह सिर्फ एक पेड़ की नहीं, बल्कि हमारी आने वाली नस्लों की सांसों की हत्या है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नगर पालिका, वन विभाग और स्थानीय प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करेगा? या फिर सिस्टम भी यही मान लेगा कि “छोड़ो, एक पेड़ ही तो था!”






