ओलावृष्टि से फसलें बर्बाद, किसानों का फूटा गुस्सा, हाईवे जाम कर मांगा “बिना सर्वे मुआवजा”

प्रदर्शनकारी किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब और आश्वासन नहीं चाहते। उनकी मांग है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और तत्काल राहत की घोषणा नहीं की जाती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
Neemuch farmers blockade

Neemuch farmers blockade

नीमच जिले में हुई तेज ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद होने के बाद आक्रोशित किसानों ने मुआवजे की मांग को लेकर हाईवे पर चक्काजाम कर दिया है। किसानों का दर्द उनकी बातों में साफ झलक रहा है, जिन्होंने अपनी फसलों को ‘बच्चे की तरह’ पाला था, लेकिन अब वे पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। अब वे बिना सर्वे के जल्दी से जल्दी मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

फसल को बच्चे की तरह पालते हैं, सब खत्म हो गया

मौके पर मौजूद एक पीड़ित किसान सुरेश ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि खेतों में अफीम, गेहूं, लहसुन और चना सभी फसलों में 100% नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि ओलावृष्टि इतनी तेज थी कि सब कुछ टूटकर नीचे गिर गया है। किसान ने भावुक होते हुए कहा, “फसल को एक छोटे बच्चे की तरह खड़ा करते हैं और बड़ा करते हैं, अफीम में उसी तरह की मेहनत लगती है”।

प्रशासन को सुध नहीं, बिना सर्वे मिले मुआवजा

किसानों में प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी है। किसानों का आरोप है कि आपदा के बाद अभी तक प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा या अधिकारी सुध लेने मौके पर नहीं पहुंचा है। भौरासा गांव के किसान लोकेश ने बताया कि उनके क्षेत्र में बहुत खतरनाक ओलावृष्टि हुई है, जिससे गेहूं, चना और अफीम में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। लोकेश ने सरकार से मांग की है कि “जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए और यह मुआवजा बिना सर्वे के मिलना चाहिए”। उन्होंने कहा कि किसान इस वक्त बहुत परेशान है क्योंकि अफीम की फसल में बहुत मेहनत लगती है।

कलेक्टर को बुलाने पर अड़े किसान

प्रदर्शनकारी किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब और आश्वासन नहीं चाहते। उनकी मांग है कि जिला कलेक्टर स्वयं मौके पर आएं और उनकी बात सुनें। जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और तत्काल राहत की घोषणा नहीं की जाती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। हाईवे पर जाम के चलते वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं और प्रशासन किसानों को समझाने की कोशिश में जुटा है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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