हनुमान जन्मोत्सव : नीमच के कलाकार की अद्भुत कला, तुलसी के पौधे के पत्तों पर लिख दी संपूर्ण हनुमान चालीसा

मिनिएचर आर्टिस्ट राहुल देव ने हनुमान चालीसा लिखते समय आस्था के साथ शुद्धता का बहुत ध्यान रखा है, उन्होंने पूरी पवित्रता के साथ हनुमान चालीसा को लिखा है और सबसे बड़ी बात उसपर नाम गोस्वामी तुलसीदास जी का ही लिखा है।
Hanuman Chalisa on Tulsi leaves

Hanuman Chalisa on Tulsi leaves

मध्य प्रदेश के नीमच जिले के अंतर्गत आने वाले छोटे से गांव कुंचड़ोद के प्रतिभाशाली सूक्ष्म कलाकार राहुल देव लोहार ने भक्ति और कला की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसे दुनिया का अपनी तरह का पहला प्रयास माना जा रहा है। राहुल ने गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित संपूर्ण हनुमान चालीसा को तुलसी के पौधे पत्तों पर अत्यंत सूक्ष्मता से उकेर कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

इस अद्भुत कलाकृति को रचने के पीछे मिनिएचर कलाकार राहुल का मुख्य लक्ष्य अपनी कला के माध्यम से भारतीय संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाना और यह सिद्ध करना है कि बिना किसी आधुनिक तकनीक के भी एकाग्रता से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। चूँकि हनुमान चालीसा के रचयिता स्वयं गोस्वामी तुलसीदास जी हैं, इसी आध्यात्मिक भाव से प्रेरित होकर राहुल ने रचयिता के नाम से जुड़े तुलसी के पत्तों को ही अपनी इस पावन कृति का आधार बनाया।

तुलसी के असली पत्तों पर लिख दी हनुमान चालीसा 

​श्रद्धा और आस्था से परिपूर्ण इस निर्माण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि राहुल ने बिना किसी लेंस या आधुनिक वैज्ञानिक उपकरण की मदद के अपनी आँखों से मात्र एक बाल वाले ब्रश (जो उन्होंने खुद बनाया है)  का उपयोग कर तुलसी के 14 असली पत्तों पर हनुमान चालीसा की सभी 84 पंक्तियाँ अंकित की हैं। कलाकार ने इस पूरी प्रक्रिया में शुद्धता का विशेष ध्यान रखा, जहाँ पत्तों पर पहले चंदन का लेप लगाया गया और फिर दीपक की प्राकृतिक कालिख व गोंद के मिश्रण से बनी स्याही का उपयोग किया गया।

करीब 18 घंटों में तैयार हुई एक अद्भुत कलाकृति 

राहुल ने बताया कि लगभग 15 से 18 घंटे के कठिन मानसिक और शारीरिक परिश्रम से तैयार हुई इस कृति को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने हेतु जिलेटिन से कवर किया गया है। राहुल का उद्देश्य अपनी इस अनूठी कला के जरिए विश्व रिकॉर्ड दर्ज कराना है, ताकि नीमच की इस पावन धरा की कलात्मक प्रतिभा और सनातन संस्कृति का गौरव पूरी दुनिया में फैल सके।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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