Mon, Jan 5, 2026

ग्रामीणों की ‘जीत’, प्रशासन की मध्यस्थता से झुका ‘गोल्ड क्रस्ट’ सीमेंट फैक्ट्री प्रबंधन, माननी पड़ी किसानों की प्रमुख मांगें

Reported by:Kamlesh Sarda|Edited by:Atul Saxena
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लिखित आश्वासन और प्रशासन की गारंटी मिलने के बाद ग्रामीणों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है। सगराना के किसानों का कहना है कि यह उनकी एकता की जीत है।
ग्रामीणों की ‘जीत’, प्रशासन की मध्यस्थता से झुका ‘गोल्ड क्रस्ट’ सीमेंट फैक्ट्री प्रबंधन,  माननी पड़ी किसानों की प्रमुख मांगें

Neemuch News

नीमच जिले के जावद की सगराना में गोल्ड क्रस्ट सीमेंट फैक्ट्री और ग्रामीणों के बीच पिछले तीन दिनों से चल रहा तीखा विवाद आखिरकार प्रशासन की सूझबूझ से सुलझ गया है। सगराना के किसानों की एकजुटता और प्रशासन के सख्त रवैये के आगे फैक्ट्री प्रबंधन को झुकना पड़ा और उन्होंने ग्रामीणों की प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है।

गुरुवार को एसडीएम संजीव साहू, सीएसपी किरण चौहान, तहसीलदार संजय मालवीय और टीआई निलेश अवस्थी की मौजूदगी में घंटों चली मैराथन बैठक और ‘खेत चौपाल’ के बाद यह सुखद निर्णय आया। इस पूरे मामले के पटाक्षेप पर एसडीएम संजीव साहू ने स्थिति स्पष्ट की।

SDM नीमच ने बताई वस्तुस्थिति 

एसडीएम संजीव साहू ने बताया कि सगराना में फैक्ट्री निर्माण और रास्तों को लेकर ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच जो गतिरोध था, उसे बातचीत के जरिए सुलझा लिया गया है। प्रशासन की मध्यस्थता में दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाया गया। फैक्ट्री प्रबंधन ने किसानों की मांगों पर सहमति जताई है। रास्तों के विवाद के लिए सीमांकन (Demarcation) की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और ग्रामीणों के हितों को सुरक्षित रखते हुए ही आगे का कार्य होगा। फिलहाल स्थिति सामान्य है।”

क्या था पूरा मामला?

विवाद की शुरुआत तीन दिन पहले तब हुई थी जब गोल्ड क्रस्ट फैक्ट्री प्रबंधन ने गांव के पुश्तैनी आम रास्तों (खसरा नं. 360/1) पर खुदाई कर दीवार बनाने की कोशिश की। इसके अलावा स्थानीय युवाओं को रोजगार न देने और बाहरी लोगों की भर्ती से ग्रामीण नाराज थे। आक्रोशित ग्रामीणों ने ‘सगराना बचाओ संघर्ष समिति’ बनाकर काम रुकवा दिया था। मामले की गंभीरता को देख प्रशासन ने फैक्ट्री गेट के बजाय खेतों में ही दरी बिछाकर ‘जनता अदालत’ लगाई थी। बैठक में तब हड़कंप मच गया था जब ग्रामीण शौकीन मेघवाल ने बताया कि सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करने के कारण फैक्ट्री अधिकारी गगन तिवारी ने उसे नौकरी से निकाल दिया। प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया था।

किन शर्तों पर बनी बात?

प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद फैक्ट्री प्रबंधन ने ग्रामीणों की 15 सूत्रीय मांगों में से प्रमुख बिंदुओं पर अपनी सहमति दे दी है ये हैं ..
रास्ता: विवादित पुराने रास्ते का सीमांकन होगा। यदि रास्ता बदला जाता है, तो पहले किसानों को 30 फीट चौड़ा पक्का वैकल्पिक मार्ग बनाकर दिया जाएगा।
रोजगार: फैक्ट्री प्रबंधन ने स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने और परमानेंट नौकरी की मांग पर सकारात्मक रुख दिखाया है।
अधिकारियों पर कार्रवाई: ग्रामीणों के साथ अभद्रता करने वाले अधिकारियों के रवैये में सुधार और सीएम हेल्पलाइन शिकायतकर्ता (शौकीन मेघवाल) के मामले का निराकरण करने का भरोसा दिलाया गया है।
विकास कार्य: गांव में गौशाला निर्माण और अन्य मूलभूत सुविधाओं में फैक्ट्री सहयोग करेगी।

किसान खुश, प्रशासन ने ली राहत की सांस

लिखित आश्वासन और प्रशासन की गारंटी मिलने के बाद ग्रामीणों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है। सगराना के किसानों का कहना है कि यह उनकी एकता की जीत है। वहीं, प्रशासन ने भी विवाद को उग्र होने से पहले सुलझाकर राहत की सांस ली है। अब देखना यह है कि फैक्ट्री प्रबंधन अपने वादों को धरातल पर कितनी जल्दी उतारता है।

कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट