शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय (VKSGMC) नीमच को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल यानी निजी हाथों में सौंपने की तैयारी के खिलाफ मेडिकल स्टूडेंट्स ने मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट्स और इंटर्न्स एकजुट होकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचें और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा और इस प्रस्ताव को तत्काल रद्द कर कॉलेज को पूर्णतः शासकीय स्वरूप में ही संचालित रखने की मांग की।
कड़ी मेहनत, NEET पास करके आए, निजीकरण से भविष्य पर संकट
मीडिया से चर्चा करते हुए मेडिकल छात्र प्रतिनिधि डॉ. साहिल ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि छात्र कड़ी मेहनत और नीट (NEET) क्वालीफाई करके सरकारी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर बनने का सपना लेकर आए थे। हाल ही में 200 नए विद्यार्थियों का बैच भी आया है। यदि कॉलेज का निजीकरण किया जाता है, तो यह न केवल छात्रों, बल्कि इंटर्न्स, फैकल्टी और नीमच की आम जनता के साथ खुला धोखा और नाइंसाफी होगी। छात्रों का कहना है कि निजीकरण के बाद फीस संरचना में भारी बढ़ोतरी की आशंका है, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्रों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा।
गरीब मरीजों के लिए इलाज होगा महंगा
छात्रों ने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया कि नीमच का मेडिकल कॉलेज और संबद्ध अस्पताल पूरे जिले और आसपास के ग्रामीण इलाकों की एक बड़ी आबादी के लिए सस्ता और सुलभ उपचार का एकमात्र बड़ा सहारा है। यदि इसे PPP मोड पर संचालित किया गया, तो जांच, दवाइयों और उपचार के शुल्क में भारी वृद्धि होगी, जिससे निर्धन वर्ग स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हो जाएगा।
कॉलेज संचालन के नियमों की अनदेखी का आरोप
छात्रों ने सवाल उठाया कि PPP मॉडल आमतौर पर उन जगहों के लिए प्रस्तावित होता है जहाँ बुनियादी ढांचे, अस्पतालों या डॉक्टरों की भारी कमी हो और नया सेटअप तैयार करना हो। जबकि नीमच का मेडिकल कॉलेज पिछले तीन वर्षों से सुचारू रूप से संचालित हो रहा है और सरकार द्वारा इस पर करोड़ों रुपये का सार्वजनिक निवेश (फंड) किया जा चुका है। ऐसे में बीच सत्र में चल रहे शासकीय कॉलेज को निजी हाथों में सौंपने का कोई औचित्य नहीं है।
जनप्रतिनिधियों से नहीं मिला ठोस आश्वासन, आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
छात्रों ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में क्षेत्रीय सांसद से भी बात की थी, लेकिन वहां से कोई संतोषजनक जवाब या ठोस आश्वासन नहीं मिला। इसी कारण उन्हें कलेक्ट्रेट आकर ज्ञापन सौंपना पड़ा। छात्रों ने स्पष्ट किया कि जब तक शासन-प्रशासन इस निजीकरण के फैसले को वापस लेने का ठोस निर्णय नहीं लेता, उनका शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
मेडिकल स्टूडेंट्स की प्रमुख मांगें
- शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, नीमच को PPP मोड पर देने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार कर इसे तत्काल रद्द किया जाए।
- कॉलेज और अस्पताल को पूर्णतः शासकीय स्वरूप में ही विकसित और संचालित रखा जाए।
- अस्पताल में आवश्यक फैकल्टी, नर्सिंग, तकनीकी स्टाफ की नियमित भर्ती हो और बजट उपलब्ध कराया जाए।
- डायग्नोस्टिक सुविधाओं, दवाओं और आधुनिक उपकरणों को सुदृढ़ किया जाए ताकि मरीजों को निशुल्क/रियायती इलाज मिलता रहे।
- छात्रों की क्लीनिकल ट्रेनिंग, इंटर्नशिप और सुरक्षा के अधिकारों को संरक्षित रखा जाए।
कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट






