नीमच कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान युवक ने खाया जहर, न्याय नहीं मिलने का लगाया आरोप, अस्पताल में कराया गया भर्ती

नीमच कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान एक युवक ने न्याय न मिलने से हताश होकर ज़हरीला पदार्थ खा लिया। वहीं इसके चलते उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
नीमच कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान युवक ने खाया जहर, न्याय नहीं मिलने का लगाया आरोप, अस्पताल में किया गया भर्ती

मध्य प्रदेश के नीमच कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान एक युवक द्वारा ज़हरीला पदार्थ खाने की घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल युवक का आरोप है कि वह पिछले एक साल से मुआवजे के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहा था, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। फिलहाल पुलिस और प्रशासन मामले की जांच कर रहे हैं, जबकि युवक का इलाज जिला अस्पताल में जारी है।

वहीं बताया जा रहा है कि युवक चेनपुरा बामनबड़ी गांव का रहने वाला है। उसका कहना है कि जुलाई 2024 में बिजली के करंट से उसकी एक गाय और एक भैंस की मौत हो गई थी। इसके बाद उसने संबंधित विभाग और कलेक्ट्रेट में कई बार आवेदन दिए, लेकिन अब तक उसे राहत या मुआवजा नहीं मिला। मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचने के बाद उसने कथित तौर पर ज़हरीला पदार्थ खा लिया। घटना के बाद जिला अस्पताल में उसका इलाज शुरू किया गया। प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

जनसुनवाई में ज़हर खाने की घटना ने बढ़ाए सवाल

दरअसल जनसुनवाई का मकसद आम लोगों की शिकायतों का समय पर समाधान करना होता है, ताकि उन्हें अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। लेकिन नीमच की इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब कोई फरियादी बार-बार आवेदन देने के बावजूद खुद को असहाय महसूस करने लगे, तो व्यवस्था की जवाबदेही कैसे तय होगी। युवक का दावा है कि उसने कई बार अधिकारियों के सामने अपनी बात रखी, लेकिन हर बार उसे केवल आश्वासन मिला। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उसके आवेदन किस स्तर पर लंबित थे या उन पर क्या कार्रवाई हुई। घटना के बाद पुलिस ने मौके से जानकारी जुटाई है और संबंधित अधिकारियों के बयान भी लिए जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और समयबद्ध कार्रवाई दोनों ही जरूरी मानी जाती हैं, ताकि तथ्यों के आधार पर फैसला हो सके।

मुआवजा प्रक्रिया और प्रशासनिक जवाबदेही पर फिर चर्चा

बता दें कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी मुआवजा प्रक्रिया और शिकायत निवारण व्यवस्था पर भी सवाल उठाता है। बिजली हादसों, प्राकृतिक आपदा या सरकारी लापरवाही से होने वाले नुकसान के मामलों में संबंधित विभागों की जांच के बाद मुआवजा दिया जाता है। यदि प्रक्रिया लंबी खिंचती है, तो प्रभावित परिवारों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

Ankita Chourdia
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