
मध्य प्रदेश के स्कूलों में वितरित किये जाने वाले मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता को लेकर हमेशा सवाल खड़े होते रहते हैं, हालाँकि इसके लिए एक व्यवस्था है उसी के तहत क्वालिटी चैक किये जाने के निर्देश है लेकिन ये व्यवस्था कितनी सही है ये बच्चों मिल रहा भोजन बता रहा है
मध्य प्रदेश के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को स्कूली शिक्षा एक साथ साथ भोजन भी दिया जाता है, कई जगह स्कूलों में ही भोजन बनता है और कई जगह मध्यान्ह भोजन विर्तन की व्यवस्था समूह यानि कोई संस्था संभालती है अब इसमें कितनी लापरवाही की जाती है इसका उदाहरण नीमच जिले में देखने को मिला है।
नीमच में शासन की महत्वपूर्ण मध्यान्ह भोजन योजना जावद तहसील में भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। तहसील के चिरमीखेडा गांव के स्कूल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वीडियो में बच्चों की थालियों में पानी जैसी पतली दाल और कच्ची-जली रोटियां साफ दिखाई दे रही हैं।
मध्यान्ह भोजन ने पानी जैसी दाल, कच्ची जली रोटी
मामले को उजागर करने वाले चिरमीखेडा गांव के निवासी रमेश बंजारा ने यह वीडियो बनाया था। उन्होंने कच्ची जली रोटियां और पानी वाली डाल का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया जो तेजी से वायरल हो गया, अब ये वीडियो उनके लिए मुसीबत बन रहा है
वीडियो बनाने वाले को ठेकेदार दे रहा धमकी
रमेश बंजारा का आरोप है कि जैसे ही यह वीडियो सामने आया, मध्यान्ह भोजन का ठेका संचालित करने वाले भगवानपुरा निवासी अमरलाल गुर्जर ने उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। इस पूरी घटना ने मध्यान्ह भोजन योजना के क्रियान्वयन पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
प्रशासन ने अब तक नहीं लिया कोई एक्शन
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस गंभीर मामले के सामने आने और वीडियो वायरल होने के बावजूद, अब तक प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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नीमच से कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट
पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

