नीमच के रतनगढ़ तहसील के ग्राम जाट में सर्वसमाज की श्मशान भूमि पर हुए अवैध कब्जे को प्रशासन ने ग्रामीणों की शिकायत के बाद हटाया। दरअसल राजस्व, पंचायत और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अवैध निर्माण ध्वस्त किया गया। वहीं अब ग्रामीण भविष्य में दोबारा कब्जा न हो, इसके लिए श्मशान भूमि की तारफेंसिंग और स्थायी सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
दरअसल श्मशान भूमि जैसी सार्वजनिक जगह किसी भी गांव की जरूरत और सामाजिक व्यवस्था का अहम हिस्सा होती है। ऐसे स्थानों पर कब्जे की शिकायतें अक्सर विवाद का कारण बनती हैं। ग्राम जाट में भी इसी तरह का मामला सामने आया, जहां एक व्यक्ति द्वारा पत्थर की दीवार बनाकर श्मशान भूमि पर कब्जा करने का आरोप लगा। ग्रामीणों ने इसे गंभीर मुद्दा मानते हुए प्रशासन को सूचना दी। शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद अवैध निर्माण को हटाने का फैसला लिया।
नीमच श्मशान भूमि अतिक्रमण पर प्रशासन की कार्रवाई
दरअसल ग्रामीणों के मुताबिक यह श्मशान भूमि लंबे समय से गांव के सभी समाजों के अंतिम संस्कार के लिए उपयोग में लाई जाती रही है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का अतिक्रमण भविष्य में बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता था। वार्ड पंच उर्मिला बाई सहित कई ग्रामीणों ने मिलकर राजस्व विभाग, पंचायत और पुलिस प्रशासन को लिखित शिकायत दी। शिकायत में बताया गया कि सार्वजनिक भूमि पर पत्थर की दीवार बनाकर कब्जा किया जा रहा है।


शिकायत के बाद पटवारी धर्मेंद्र सेन के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम गांव पहुंची। पुलिस की मौजूदगी में पूरे मामले का निरीक्षण किया गया और अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू हुई। जेसीबी मशीन की मदद से पत्थर की दीवार और अन्य निर्माण को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा। प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक भूमि पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसी शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों ने की तारफेंसिंग की मांग, सार्वजनिक भूमि की सुरक्षा पर जोर
दरअसल अतिक्रमण हटने के बाद गांव के लोगों ने प्रशासन का आभार जताया। उनका कहना है कि समय रहते कार्रवाई होने से एक बड़ा विवाद टल गया। हालांकि ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि श्मशान भूमि की सीमाएं स्पष्ट करने के लिए जल्द से जल्द तारफेंसिंग कराई जाए। उनका मानना है कि यदि भूमि की स्थायी घेराबंदी हो जाएगी तो भविष्य में दोबारा कब्जे की संभावना काफी कम हो जाएगी।






