नीमच जिले के झातला गांव में 5 किलोमीटर लंबी सड़क ग्रामीणों के लिए गंभीर समस्या बन गई है। यह गांव अपने प्रथम ग्राम न्यायालय और गोकुल ग्राम के रूप में प्रसिद्ध है, परंतु वर्तमान में इसकी पहचान बदहाल सड़क के कारण हो रही है। झातला से झातला मोड़ तक का यह महत्वपूर्ण मार्ग बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुका है। इन गड्ढों के कारण आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और आए दिन दुर्घटनाएं घटित हो रही हैं। स्थानीय निवासियों को प्रतिदिन इन गड्ढों से जूझना पड़ रहा है, जिससे उनकी सुरक्षा पर भी प्रश्नचिन्ह लग गया है।
करीब 7 हजार की आबादी वाले इस गांव के लोगों को इस जर्जर सड़क के कारण रोजमर्रा के कार्यों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों को अपनी उपज मंडियों तक ले जाने में परेशानी हो रही है, जिससे उनके समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है। व्यापारियों का व्यवसाय भी इस कारण प्रभावित हो रहा है, क्योंकि ग्राहकों और माल की आवाजाही में बाधा आ रही है। स्कूली बच्चों को स्कूल पहुंचने में कठिनाई होती है, और उन्हें दुर्घटना का जोखिम भी उठाना पड़ता है। प्रसिद्ध भेरुनाथ मंदिर दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को भी इस मार्ग से गुजरने में भारी असुविधा हो रही है, जिससे मंदिर की ओर आने वाले भक्तों की संख्या पर भी असर पड़ रहा है।
कीचड़ और फिसलन से पैदल चलना भी हुआ मुश्किल
बारिश के दिनों में इस मार्ग की स्थिति और भी विकट हो जाती है। गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा कई गुना बढ़ जाता है। कई बार वाहन इन गड्ढों में फंस जाते हैं, जिससे लंबा जाम लग जाता है और यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। कीचड़ और फिसलन के कारण पैदल चलना भी दूभर हो जाता है। ग्रामीणों को इस सड़क पर यात्रा करते हुए हर पल दुर्घटना का भय सताता रहता है।
ग्रामीणों ने उठाई सड़क निर्माण की मांग
यह गांव जावद विधानसभा क्षेत्र में आता है। यहां की जनता अब शासन-प्रशासन से सवाल कर रही है कि लगातार पांच बार भाजपा विधायक चुने जाने के बावजूद यह सड़क अपनी बदहाली पर आंसू क्यों बहा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के खोखले दावों के बीच इस मूलभूत सुविधा का अभाव उन्हें निराश कर रहा है। जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए आश्वासन अब केवल कोरे वादे प्रतीत होते हैं। जनता अब केवल आश्वासन नहीं चाहती है, बल्कि इस मार्ग का तत्काल और स्थायी निर्माण चाहती है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक इस सड़क का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे। यह सड़क ग्रामीणों के धैर्य की परीक्षा ले रही है और अब वे ठोस कार्रवाई की प्रतीक्षा में हैं।






